
RKTV NEWS/दुमका (झारखंड)15 नवंबर।धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती एवं झारखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आज कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दुमका के सांसद नलिन सोरेन, विधायक लुईस मरांडी, देवेंद्र कुंवर, जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने झारखंड के गौरवशाली इतिहास, जनजातीय नायकों के योगदान तथा राज्य के उज्ज्वल भविष्य पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आमजन, छात्र-छात्राएं, विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर सभी अतिथियों सहित कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राएं, अधिकारियों, जन प्रतिनिधि गण तथा जिले के गणमान्य व्यक्तियों ने शपथ लिया कि
“हम गौरवान्वित हैं कि हम प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण सुंदर और समृद्ध झारखण्ड के निवासी हैं। हमें अपने महान और संघर्षशील पूर्वजों से यहां की समृद्ध संस्कृति, भाषा और सभ्यता विरासत में मिली है।
हमारा युवा झारखण्ड अपने निर्माण के 25 वर्ष पूरा कर रहा है। हम शपथ लेते हैं कि हम हमारे झारखण्ड की परंपरा और संस्कृति को संरक्षित करते हुए राज्य के सतत विकास और प्रगति के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहेंगे।”
इस अवसर पर दुमका के सांसद नलिन सोरेन ने कहा कि आज हम सभी झारखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगाँठ हर्ष और गर्व के साथ मना रहे हैं। झारखंड राज्य का निर्माण एक लम्बे और ऐतिहासिक जनांदोलन का परिणाम है। आदिवासी समाज तथा यहाँ के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो—यह स्वर्गीय श्री शिबू सोरेन जी की दूरदर्शी सोच थी। उनका यह दृढ़ विश्वास था कि अलग राज्य के गठन के बिना इस क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं है।
सुदूरवर्ती इलाकों में भी विकास की किरण पहुँचाने के प्रयास निरंतर किए गए हैं। 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के साथ ही विकास की नई यात्रा प्रारंभ हुई, जो आज भी समान गति से आगे बढ़ रही है। जहाँ कभी लोगों को सड़क, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं सरकार तथा जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से अब स्वच्छ पेयजल घर-घर तक पहुँच रहा है। खेतों तक पानी पहुँचाने और किसानों की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक योजनाएँ चलाई गई हैं तथा कार्य निरंतर जारी हैं।
उन्होंने कहा कि 25 वर्ष का यह झारखंड और अधिक विकसित, सशक्त और समृद्ध बने—इसके लिए हम सभी का सहभागी बनना आवश्यक है। झारखंड का उज्ज्वल भविष्य जन-सहभागिता और सामूहिक प्रयासों पर ही निर्भर करता है।
इस अवसर पर जामा विधानसभा की विधायिका लुईस मरांडी ने कहा कि झारखंड अब युवावस्था में प्रवेश कर चुका है—25 वर्ष का सशक्त और उर्जावान राज्य। आज हम सभी गर्व के साथ राज्य स्थापना दिवस मना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों की यात्रा में झारखंड ने कहाँ-कहाँ प्रगति की है और किन क्षेत्रों में और आगे बढ़ने की आवश्यकता है, इस पर विचार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने जिला प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन की समर्पित टीम सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पूरी निष्ठा से लगी हुई है, जिसका परिणाम है कि योजनाएँ धरातल पर दिख रही हैं और लोगों को वास्तविक लाभ मिल रहा है। सरकार ‘अंतिम व्यक्ति’ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है, और जिला प्रशासन इस कार्य को ज़मीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जो लोग किसी कारणवश जिला मुख्यालय तक नहीं पहुँच पाते, उनके लिए सरकार ने “सरकार आपके द्वार” जैसी जनकल्याणकारी पहल शुरू की है, जिसके माध्यम से अधिकारी सीधे पंचायतों में जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। प्रखंड कार्यालयों में आयोजित होने वाले जन-सुनवाई कार्यक्रमों में भी आमजन की समस्याएँ प्राथमिकता के आधार पर दूर की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास अब स्पष्ट रूप से धरातल पर दिख रहे हैं। सर्वजन पेंशन योजना, मईया सम्मान योजना जैसी पहल ने महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान लाने का कार्य किया है। जिनके पास कोई सहारा नहीं है, राज्य सरकार उनका सहारा बनकर खड़ी है।
माननीय मुख्यमंत्री ने महिलाओं को सशक्त बनाने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना ने युवाओं के लिए नए अवसर प्रदान किए हैं।
अंत में उन्होंने स्वर्गीय शिबू सोरेन को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्षपूर्ण प्रयासों और नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज हमें अपना अलग राज्य—झारखंड—प्राप्त हुआ है।
जरमुंडी के विधायक देवेंद्र कुँवर ने कहा कि 25 वर्ष का यह झारखंड आज अनेक सकारात्मक परिवर्तनों का प्रतीक बन चुका है। राज्य ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, परंतु इसे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक सशक्त और अग्रणी राज्य के रूप में पहचान दिलाने के लिए हम सभी को मिलकर और अधिक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि गुरुजी, स्वर्गीय श्री शिबू सोरेन जी के लंबे संघर्ष और अदम्य इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि हमें अपना अलग राज्य—झारखंड—प्राप्त हुआ है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि इस राज्य को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए सामूहिक रूप से सोचा जाए, योजनाएँ बनाईं जाएँ और उन्हें दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया जाए।
उन्होंने आह्वान किया कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा, ताकि हमारा राज्य विकास, समृद्धि और प्रगति का नया उदाहरण बन सके।
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि आज हम सभी भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और झारखंड राज्य के 25वें स्थापना दिवस के इस पावन अवसर पर एकत्र हुए हैं। यह दोहरा उत्सव न केवल हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि हमारे राज्य की अदम्य आत्मा, संघर्ष, परंपरा और विकास यात्रा का भी स्मरण कराता है। 25 वर्ष पूर्व जिस झारखंड राज्य ने अपने अस्तित्व की पहली सांस ली थी, आज वह अपनी प्राकृतिक संपदा, जनजातीय गौरव, मेहनतकश लोगों और साहसिक परंपराओं के लिए पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है।
पिछले 25 वर्षों में हमारे राज्य ने विकास के अनेक आयामों को छुआ है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, कृषि, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। दुमका जिला भी इस प्रगति की यात्रा में निरंतर आगे बढ़ते हुए नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से आज दुमका जिला पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। यहाँ फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल आधुनिक तकनीकों से युक्त भवन के साथ तैयार है। जिले में 108 उपकेंद्र, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 9 BPHU, 228 आयुष्मान स्वास्थ्य मंदिर और क्रिटिकल केयर ब्लॉक ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाया है। मुख्यमंत्री अबुवा स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को 15 लाख रुपये का नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा रहा है—जो हमारे राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा को नए स्तर पर ले गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी दुमका जिले ने नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। जिले में 4 मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, 15 आदर्श विद्यालय, 13 पीएम श्री विद्यालय, 10 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 6 मॉडल स्कूल और एक आवासीय विद्यालय संचालित हैं। सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के विस्तृत और आधुनिक परिसर का निर्माण भी पूरा हो चुका है, जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ लेकर आया है। इसके साथ ही 275 विद्यालयों में ICT लैब और 175 स्मार्ट क्लास की स्थापना से शिक्षा का स्तर और भी सुदृढ़ हुआ है।
पथ निर्माण के क्षेत्र में भी दुमका जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। विगत 25 वर्षों में 1560 किलोमीटर ग्रामीण पथों का निर्माण हुआ है। PMGSY के तहत 1209 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। दुमका रिंग रोड निर्माण से शहर को नई दिशा मिलेगी, वहीं गोविंदपुर–साहेबगंज मार्ग से रांची आवागमन और भी सुगम हुआ है। मकरमपुर में सेल्फी ब्रिज और कई महत्वपूर्ण सड़क मार्गों के चौड़ीकरण के कार्य ने जिले की कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी है।
पर्यटन, कला, संस्कृति और खेल के क्षेत्र में भी दुमका निरंतर आगे बढ़ रहा है। इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा हो चुका है। म्यूजियम निर्माण कार्य प्रगति पर है। कमारडांजी में फुटबॉल स्टेडियम और स्पोर्ट्स एकेडमी तथा विभिन्न पर्यटन स्थलों के विकास का कार्य जिले को सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का केंद्र बना रहा है। कन्वेंशन सेंटर और मल्टीपर्पस हॉल का निर्माण भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में हमारे जिले ने बड़ी प्रगति की है। 2 लाख से अधिक महिलाओं को मुख्यमंत्री मइया सम्मान योजना का लाभ मिला है, 2.27 लाख से अधिक लाभुकों को विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, और 68,957 किशोरियों को सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। यह सब हमारे सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है।
जल संसाधन विभाग द्वारा मसल्या–रोनहेवर मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके पूर्ण होने पर 226 गांवों के खेतों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे जिले की कृषि क्षमता और बढ़ेगी।
कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग द्वारा किसानों को नई तकनीक, आधुनिक कृषि यंत्र और बेहतर बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम, लीची, नींबू, केला और काजू जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विद्युत विभाग द्वारा घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है। जहां-जहां बिजली नहीं पहुँच पाई थी, वहाँ मुख्यमंत्री उज्ज्वला झारखंड योजना के तहत बिजली पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
उद्योग विभाग द्वारा तसर कीट पालन और साड़ी-बुनाई जैसे पारंपरिक व्यवसायों को बढ़ावा दिया जा रहा है। दुमका का मशहूर मधुवन सिल्क पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बना चुका है।
आज झारखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा में शामिल सभी दुमका वासियों के साथ इस गौरवपूर्ण अवसर पर मैं यह शपथ लेता हूँ कि आने वाले वर्षों में हम सभी मिलकर झारखंड राज्य और दुमका जिले को और अधिक समृद्ध, सक्षम और विकसित बनाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। विकास की अनंत संभावनाओं को साकार करने की यह यात्रा इसी तरह आगे बढ़ती रहेगी।
उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान ने कहा कि झारखंड की समृद्ध संस्कृति, जनजातीय विरासत और विकास की निरंतर यात्रा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि शासन की नीतियों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी से सहयोग, सहभागिता और सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से एक मजबूत और समृद्ध झारखंड के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
जिला परिषद अध्यक्ष जोयस बेसरा ने सभी को बिरसा मुंडा जयंती तथा राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी। सर्वप्रथम उन्होंने मंच पर उपस्थित दुमका लोकसभा क्षेत्र के सांसद नलिन सोरेन को झारखंड आंदोलनकारी में अपनी अहम भूमिका निभाने हेतु बधाई दी। कहा की राज्य आज 25वां वर्षगांठ मना रहा है। 25 वर्ष पहले दुमका की विकास गति बहुत धीमी थी आज हमें कई विकासात्मक कार्य जिले में देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य में इस 25 वर्षों में बड़ी अहम कार्य हुए हैं। आदरणीय शिबु सोरेन जी का यह बहुत बड़ा सपना था।
उनके साथ कई आंदोलनकारी ने भी यह सपना देखा था कि झारखंड एक दिन विकसित राज्य बनेगा। कहा कि किसी युवा का 25वां वर्ष बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, कोई अपने सपने की और अग्रसर रहता है कोई अपने लक्ष्य को प्राप्त भी कर लेता है। कई युवा अपना समय अन्य कार्यों में व्यतीत करके बर्बाद कर रहे हैं उन्हें भी सही राह दिखाने का कार्य राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है ताकि वह अपना विकास कर सके। छात्र-छात्राओं से भी निवेदन है कि वह समय का सदुपयोग करें और अपनी प्रतिभा को पहचान कर लक्ष्य प्राप्ति करें। आने वाले भविष्य को और सुदृढ़ और मजबूत करने की दिशा में हमें कार्य करना चाहिए।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने कहा कि आज हम सभी रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। आज का यह कार्यक्रम पूरा देश देख रहा है। 25 वर्ष पहले झारखंड राज्य की स्थापना हुई थी। 15 नवंबर 2000 का वही दिन है जब हर एक झारखंडियों के मन में उत्साह आया था। उस वक्त जो विकास की कल्पना हमने की थी उस पर हमने कई लक्ष्य को पूरा किया है। कुछ लक्ष्य प्राप्त करना बाकी है, निश्चित तौर पर हम झारखंडी अपने मेहनत और लगन से झारखंड को विकसित राज्य बनाने का कार्य करेंगे। झारखंड राज्य के कई योद्धाओं ने देश की आजादी के लिए अपना बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया था, उन्हें हमें याद करने की आवश्यकता है।
उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। जैसे देश की आजादी में बिरसा मुंडा का नाम दिया जाता है, वैसे ही झारखंड राज्य अलग करने में और झारखंड राज्य के विकास गति को बढ़ाने में आदरणीय शिबू सोरेन जी का नाम लिया जाता है। हमारा इतिहास संघर्ष करने वाला, उलगुलान करने वाला रहा है।
आज के दौर में भी उलगुलान करना है बस उसका तरीका बदल गया है। हमें परिस्थितियों से लड़ना है और विजय पाना है। यह 25 साल का जो सफर हमने तय किया है यह अंत नहीं या शुरुआत है। हमें अपने पूर्वजों का सपना पूर्ण करना है। राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा की दिशा में कई कार्य किए हैं आप सभी के सहयोग से झारखंड तेजी से विकास के राह पर चल पड़ा है। आगे मुझे पूरा विश्वास है कि झारखंड को हम नहीं ऊंचाई पर देखेंगे।
इस अवसर पर वन प्रमंडल पदाधिकारी सात्विक व्यास ने कहा कि आज हमारा राज्य 25 वर्ष का हो गया है ऐसी कई मूलभूत सुविधाएं जो पहले हमें उपलब्ध नहीं थे, वह आज उपलब्ध है और अभी हमें बहुत दूर जाना है। जितनी दूर सड़क आई है उससे भी और दूर सड़क ले जाना है। जितने घरों में अभी बिजली आई है और भी घरों को चमकाना है।
कहा कि यहां जो बच्चे बैठे हुए हैं, आपको भी सरकार से प्रशासन से सवाल करना चाहिए। कि मेरे स्कूल में पंखा क्यों नहीं है, मेरे गांव में सड़क कब तक आएगी। आप ही इस राज्य का और देश का कल है। आपको समझना होगा कि आपका कानून क्या है, आपको समझना होगा आपका अधिकार क्या है। तब जाकर आप अपनी मां के लिए, पिता के लिए, अपने भाई के लिए सब कर सकते हैं जो सपना आप देख रहे हैं। इसके लिए आपको जो संघर्ष करना पड़े करिए।
इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में नदियां धीरे धीरे शीर्षक पर कविता सुनकर सबका मनोबल बढ़ाया।
मौके पर अन्य अतिथियों ने भी अपनी बातों को सबके समक्ष रखा।
इसके उपरांत आंदोलनकारी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा सरकार के विभिन्न योजनाओं के परिसंपत्तियों का वितरण किया गया।
अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रम में नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से 1855 में हुई संताल हुल की कहानी को प्रदर्शित किया गया।
