व्याख्यान, कला प्रदर्शनी एवं लोकनृत्यों का हुआ आयोजन।

भगवान बिरसा मुंडा व सरदार पटेल को किया गया याद।

जनजातीय गौरव एवं उनकी जीवनशैली पर आधारित रहा कार्यक्रम।
खैरागढ़/ छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 01 नवंबर। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में कल जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। कार्यक्रम जनजातीय गौरव एवं उनकी जीवनशैली पर आधारित रहा जिसके तहत व्याख्यान, कला प्रदर्शनी एवं लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां दी गईं। कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। सर्वप्रथम कुलपति ने कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा आदिवासी संस्कृति तथा उनकी वेशभूषाओं को प्रदर्शित किया गया था। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा भगवान बिरसा मुंडा एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
प्रभारी कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं, भले ही हमारा रहन-सहन और खान-पान अलग हो। ऐसे में हमारे बीच किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं होना चाहिए। स्वतंत्रता पश्चात भारत में एकता लाने का श्रेय सरदार वल्लभ भाई पटेल को जाता है। जब भारत आजाद हुआ तब देश के अंदर सभी शासक स्वतंत्र हो गए। इन शासकों में एकता लाना कठिन कार्य था, जिसे सरदार पटेल ने पूरा किया। भगवान बिरसा मुंडा और सरदार पटेल दोनों एकता के प्रतीक हैं। इनका अनुसरण करते हुए विद्यार्थी एक होकर चलें।
सह-प्राध्यापक डॉ. देवमाईत मिंज ने कहा कि गौरव दिवस हमारे अतीत के गौरव को प्रदर्शित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन दर्शन की मूल अवधारणाओं से अवगत कराया। हमारे देश को स्वतंत्र कराने में सबसे अधिक योगदान आदिवासियों का ही रहा है। डॉ. मिंज ने कहा कि आदिवासी सामुदायिक उत्तरदायित्व के साथ अपना जीवन जीते हैं, वर्तमान समय में हमें यह सोचना आवश्यक है कि सह-अस्तित्वपूर्ण अवधारण के साथ हम कैसे रहें। अंत में लोक संगीत एवं कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव के मार्गदर्शन एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपशिखा पटेल के निर्देशन में विद्यार्थियों ने आदिवासी लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी।
इस दौरान विद्यार्थियों ने सरहुल नृत्य एवं बैगा नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक जगदेव नेताम ने किया तथा आभार प्रदर्शन सह-प्राध्यापक डॉ. देवमाईत मिंज ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. डॉ. मृदुला शुक्ल, सह-प्राध्यापक वेंकट आर गुडे, सहायक प्राध्यापकगण डॉ. छगेन्द्र उसेंडी, डॉ. रबीनारायण गुप्ता, संदीप किंडो सहित शिक्षकगण तथा विद्यार्थी-शोधार्थीगण उपस्थित रहे।

