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भोजपुर: मनाई गई लोक नायक जयप्रकाश की 123 वीं जयंती।

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 11 अक्टूबर।लोकनायक जयप्रकाश स्मारक संस्थान के तत्वावधान में लोक नायक जयप्रकाश नारायण की 123 वीं जयंती का आज वृहद आयोजन किया गया. प्रातः 7 बजे कलक्ट्री तालाब स्थित उनकी प्रतिमा पर नारों के साथ माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. 1974 आंदोलन के जेपी सेनानी, सामाजिक कार्यकर्त्ता, रंगकर्मी, युवा, बुद्धजीवी और शहर के गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धांजलि दी और श्रद्धासुमन अर्पित किया. श्रद्धांजलि देने वालों में जेपी सेनानी रमाकांत ठाकुर, संस्थान के उपाध्यक्ष रबिन्द्र नाथ त्रिपाठी, प्रो• नीरज सिंह, सुशील तिवारी, नाथू राम, महासचिव सुशील कुमार, गुलाबचंद प्रसाद, अश्वनी सिन्हा, सलिल जी,अशोक मानव, मुन्ना जी, परशुराम चौधरी, कपिलदेव अकेला,मिंटू सिंह, छोटू सिंह, विश्वनाथ पाण्डेय, इंदु देवी, कृष्णेन्दू जी, अशोक शर्मा, साहेब लाल यादव, डी राजन, विश्वनाथ जी, अनन्त चौधरी एवं बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा रंगकर्मी शामिल हुए.
माल्यार्पण के पश्चात् पूर्व विधायक रमाकांत ठाकुर की अध्यक्षता में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. विचारगोष्ठी का संचालन अशोक मानव ने किया. डॉक्टर नीरज सिंह ने लोकनायक जयप्रकाश की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जे. पी. युवावस्था में अध्ययन के लिए अमेरिका चले गए थे. वहां वो अध्ययन के साथ -साथ कामगारों के आंदोलन से भी जुड़े रहे. 1929 में अपनी पी. एच. डी .अधूरी छोड़कर भारत आ गए और आजादी के आंदोलन में शामिल हो गए. 1942 के ‘भारत छोडो’ आंदोलन में इनकी नेतृत्वकारी भूमिका थी. उन्होंने आचार्य नरेन्द्र देव और डा. लोहिया के साथ मिलकर ‘कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी ‘ कि स्थापना कि थी. बाद में सक्रिय राजनीति से अलग होकर विनोबा भावे के ‘भूदान आंदोलन’ में जीवनदानी बन गए. मार्च 1974 में बिहार में छात्रों का आंदोलन शुरू हो गया था, अप्रैल 1974 में छात्रों के आग्रह पर आंदोलन का नेतृव इस शर्त ओर स्वीकारा किया कि यह आंदोलन पूर्णतः शान्तिमय होगा. मेरी विचार यात्रा नामक उनकी पुस्तक में उनके परिवर्तनकारी दर्शन को पढ़ा जा सकता है. महासचिव सुशील कुमार ने बताया कि जे. पी. अमेरिका में अपनी पी. एच. डी. कि पढ़ाई पूरी कर ली थी और शोधपात्र भी सबमिट कर दिया था जो हाल में 1974 आंदोलन के इतिहास पर छपी आठ वॉल्यूम कि ग्रंथावली में प्रकाशित भी हुई है. लेकिन पी. एच. डी. का इंटरव्यू दिए बगैर वापस आ गए. उस शोधपात्र में उनका जो चिंतन था वह उनके सम्पूर्ण क्रांति के दर्शन तक बना रहा. उनकी मुख्य विचारधारा थी कि ” लोकतंत्र में सत्ता पर जनता का नियंत्रण आवश्यक है “. अपने इस दर्शन को स्थापित करने में सत्ता से अलग रहते हुए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया. लोकनायक जयप्रकाश महात्मा गाँधी के विचार परिवार से सम्बंधित थे. गाँधी जयंती के अवसर पर जे. पी. के अनुयायियों द्वारा बनारस के सर्वसेवा संघ परिसर को सरकार द्वारा अवैध कब्ज़ा कर उसे बुलडोजर से ध्वस्त करने के खिलाफ बनारस से दिल्ली तक की पदयात्रा पर निकल चुके हैं. “एक कदम गाँधी के साथ” के बैनर से निकली यह यात्रा अलाहाबाद बाद से आगे निकल चुकी है. जगह- जगह आम नागरिकों द्वारा इस यात्रा जा भव्य स्वागत हो रहा है. यह गाँधी और जे. पी. जैसे महामानवो के कर्मों का ही परिणाम है.
गोष्ठी के अंत में रमाकांत ठाकुर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जे. पी. दौर और आज के दौर में कितना फर्क आआया है और आज के युवाओं को क्या जिम्मेवारी उठानी चाहिये, इसपर हमें चिंतन करना चाहिये.
अंत् में संचालक अशोक मानव ने बनारस से देहली पदयात्रा में शामिल मूम्बई के पदयात्री श्याम नारायण मिश्र की शहादत को नमन करते हुए शोक प्रस्ताव पेश किया. श्याम नारायण मिश्र को सबों ने दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि अर्पित की.
सांध्य वेला में जे. पी. स्मारक पर 123 दीप का प्रज्ज्वलन कर रौशनी की गई।

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