
एक पानी की बचत के साथ मिलता है एक अतिरिक्त फसल उत्पादन करने का समय।
RKTV NEWS/गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)11 अक्टूबर। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों के हितों के लिए देखे गए सपने जिसमें देश के किसानों की आमदनी दुगनी और उनके जीवन स्तर को संवारने की परिकल्पना को मूर्त रूप देने में सवाना कंपनी के धान के सवा 7501 की किस्म काफी मददगार साबित हो रही है। जिससे किसानों की आमदनी दुगनी हो रही है। उक्त बातों का संबोधन करते हुए सवाना कंपनी के जोनल सेल्स मैनेजर मलय मिश्रा ने आज दूरभाष पर वार्तालाप करते हुए कही। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए सवाना की सवा 7501 किसी वरदान से कम नहीं है। जो किसानों को मात्र 125 दिनों में ही प्रति एकड़ औसतन 36 से 40 क्विंटल धान की पैदावार देती है। जो आज तक अभी तक किसी अन्य धान की किस्म से नहीं मिली है।मलय मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की किसानों के प्रति देखे गए उनके आर्थिक संबल को मजबूती प्रदान करने की परिकल्पना को दोहराते हुए बताया की इस परिकल्पना को मजबूती देने में सवा 7501 काफी हद तक सहायक सिद्ध हो रही है। इससे 125 दिनों में कम से कम एक पानी की बचत के साथ किसानों को एक और फसल उगाने का मौका भी मिल जाता है जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होती है।
उन्होंने बताया कि कंपनी स्तर पर प्रदेश भर में किसानों को इस उन्नत किस्म के बीज की जानकारी देने हेतु किसान गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है साथ ही इसकी बुआई के पश्चात पैदावार का निरीक्षण भी काफी सूक्ष्म तरीके से किया जा रहा है। ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसके प्रत्यक्ष फायदों से अवगत कराया जा सकें।
श्री मिश्रा ने बताया कि इसी के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के महराजगंज में किसानों द्वारा 28 मई 2025 को सिड्रिल मशीन से सवा 7501 की गई सीधी बुआई से तैयार फसल का निरीक्षण महाराजगंज के चौक बाजार स्थित चौक छावनी के बाबा लक्ष्मण नाथ के निर्देशन में शुक्रवार को गोरखपुर मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक डॉ अरविंद सिंह,कृषि विज्ञान केंद्र पीपीगंज ,गोरखपुर के निदेशक डॉ राजेश कुमार सिंह,डॉ अवनीश कुमार सिंह,अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान,वाराणसी के कृषि वैज्ञानिक डॉ अजय,उप कृषि निदेशक महराजगंज डॉ संजीव, लेखापाल सुनील कुमार द्वारा किया गया। साथ ही 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्र में धान की कटाई तथा थ्रेसिंग कर शुद्ध धान का वजन किया गया। जिसमें 40.20 क्विंटल प्रति एकड़ का रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त हुआ।
जोनल सेल्स मैनेजर मलय मिश्रा ने किसानों से आह्वाहन करते हुए सवा 7501 किस्म के इस्तेमाल की भी बातें कही।
