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भोजपुर मे गुड़ क्रांति संभव : सहायक निदेशक रामकुमार

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता से गुड़ की मांग बढ़ी : डा पी के द्विवेदी

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 अक्टूबर। सोमवार को गन्ना विकास कार्यक्रम अन्तर्गत भोजपुर जिला अंतर्गत बड़हरा प्रखण्ड के ग्राम लौहर कला में 40 कृषको का एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सहायक निदेशक गन्ना उद्योग विभाग रामकुमार ने बताया की विभाग की पूरी कोशिश है कि जिले में गन्ने की खेती को बढ़ावा मिले और इसके लिए कई तरह की योजनाएं विभाग के द्वारा निर्मित की गयी हैं जिसके अंतर्गत यांत्रिकीकरण नवीन प्रबोधों के अनुदान पर उपलब्धता तथा किसानों को राज्य केंद्र और राज्य के बाहर प्रशिक्षित करने के कई कार्यक्रम है .
शरद कालीन गन्ना बोआई के संबंध में डॉ प्रवीण कुमार द्विवेदी वरीय कृषि वैज्ञानिक ने विस्तृत रूप से किसानों को जानकारी दी । इन्होंने बताया कि यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लिए कई किस्म है जिनको लगाकर गन्ने की अच्छी फसल ली जा सकती है आज के समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बड़ी है और गुड़ की मांग बहुत ज्यादा बड़ी है जिसके लिए गन्ने का होना अति आवश्यक है और धान गेहूं की पारंपरिक खेती की तुलना में गन्ने से ज्यादा लाभ लिया जा सकता है।गन्ना फसल के साथ अंतर्वर्ती फ़सल के रूप में सब्जियां मसाले आलू प्याज लगाकर ज्यादा लाभ लेने की जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अनिल कुमार यादव ने दिया।डा द्विवेदी ने आगे बताया कि जिन क्षेत्रों में गुड़ का ज्यादा प्रयोग होता है वहां पर डायबिटीज के पेशेंट कम पाए जाते हैं क्योंकि गुड़ मे कई प्रकार के विटामिन पोटाश मैग्नीशियम आयरन जैसे खनिज तत्व के साथ में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है वैसे भी गन्ना तथा गुड़ हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है खास करके बिहार के सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्यौहार छठ की कल्पना इन दोनों के बिना नहीं की जा सकती है एक समय था जब बिहार राज्य में पूरे देश का 20% चीनी का उत्पादन हुआ करता था हम पुणे उसे गौरव को प्राप्त कर सकते हैं और इसके लिए हमें अपने क्षेत्र में ईख की खेती को बढ़ाना होगा।कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने जानकारी दी कि उनके क्षेत्र में इस फसल के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं क्योंकि सालों भर यहां पर ईख का रस एक लोकप्रिय प्रिया के रूप में उपयोग में आ रहा है और इसके लिए भी इसकी खेती आवश्यक है।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन सहायक राजेश कुमार के द्वारा दिया गया।

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