
मशहूरो मारूफ़ शायर डा क़ासिम ख़ुरशीद के निधन पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष ने व्यक्त की अपनी शोक संवेदनाएं।
RKTV NEWS/पटना(बिहार)30 सितंबर। उर्दू और हिन्दी शायरी के रौनक रहे, मशहूरो मारूफ़ शायर डा क़ासिम ख़ुरशीद नहीं रहे। इनके आकस्मिक निधन पर दुःख और अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ ने कहा कि इनका निधन बेइंतहा अफ़सोसनाक है।शहर का एक ज़िंदा शायर यों चला जाएगा, यकीन नहीं होता। उर्दू और हिन्दी शायरी के इस नुक़सान को भरना बहुत मुश्किल होगा! खुदा उन्हें जन्नत नसीब दें।ईश्वर उनकी रूह को तस्कीन दें शांति दे। उनके परिजनों को यह दुःख- दर्द सहने की ताक़त दें। डॉ सुलभ ने पुनः अपने दुःख को प्रकट करते हुए इनके निधन को बेहद अफ़सोसनाक बताते हुए कहा कि इसे लफ़्ज़ों में बयान मुमकिन नहीं है।मेरे अच्छे दोस्त थे! बड़े ख़ुलूश से मिलते और इज़्ज़त करते थे।उनकी कमी ताउम्र खलती रहेगी। सुख़नवरों की महफ़िल की रौनक थे। अब शायरी की महफ़िलें सूनी लगेंगी।
