सिक्किम के लोटस महिला सहायता समूह से जुड़ी करमा यंग जूम ने पहली बार अपने उत्पादों का मेले में लगाया है स्टॉल।

जीविका दीदियों की रसोई का आगंतुक ले रहे चटखारा।

लिट्टी चोखा सहित अन्य स्वादिष्ट देशी और पौष्टिक व्यंजनों की है मेले में उपलब्धता।

वर्ष में दो बार होता है मेले का आयोजन,लोगो को रहता है इंतेज़ार।

देश के विभिन्न राज्यों की समूहों से जुड़ी महिला उद्यमी एक दूसरे की सभ्यता और संस्कृति से हो रही परिचित।

खरीदारों को भा रहे लकड़ी के कसीदाकारी उत्पाद।

परिवार संग महिला और बच्चे भी ले रहे मेले का आनंद।

दिन प्रतिदिन आगंतुकों और व्यवसाय का बढ़ रहा ग्राफ।
RKTV NEWS/पटना (बिहार )15 सितंबर।ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला ग्रामीण उद्यमिता एवं शिल्प को प्रोत्साहन तथा बड़ा बाज़ार देने के लिए आयोजित है।इस मेला में आकर आगंतुक सदियों पुरानी शिल्प और लोककला से परिचित हो रहे हैं और अपने घर -दुकान के सजावट तथा जरूरत के हिसाब से खरीददारी कर रहे हैं l सरस मेला के आयोजन का इंतेज़ार क्रेता और विक्रेता दोनों को रहता है।बिहार सरस मेला राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित है और इसकी अपनी अलग ही पहचान है।लिहाजा बिहार में प्रतिवर्ष जीविका द्वारा दो बार आयोजित किया जाता है। इस वर्ष का यह प्रथम संस्करण है।
बिहार में आयोजित इस मेला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आकर स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाएं एक-दुसरे के संघर्ष और सफलता से रूबरू होती हैं। स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाएं सरस मेला में कुशल उद्यमी के तौर पर शिरकत कर रही हैं और अपने-अपने उद्यम को सफलता के शिखर पर ले जाने की दास्ताँ सुनाती हैं। जब भी मौका मिलता है एक-दुसरे के स्टॉल पर जाकर उनके हस्तशिल्प, परम्परा, लोक कला , लोक कलाकृति और उसके ब्रांडिंग आदि के बारे में जानती-समझती हैं और फिर अपने यहाँ जाकर उसे लागू करती हैं l
सिक्किम राज्य के काबी जिला से आई करमा यंग ज़ूम अपने सहयोगी डिकी के साथ पहली बार बिहार आई हैं l वो लोटस जीविका महिला सहायता समूह से वर्ष 2016 से जुडी हैं और औषधीय फूल और पत्तों से साबुन, इत्र, जुश आदि बनाकर बिक्री करती हैं l वो साल भर में महज 15 दिन के लिए अप्रैल माह में खिलने वाले फूल रोडोडेन्द्रम से साबुन और इत्र बनाकर बिक्री के लिए लाई हैं l साथ ही मगवर्ट पौधे की पट्टी से भी साबुन और औषधीय जुश भी उनके द्वारा बिक्री की जा रही है l हस्तशिल्प के तहत पी.पी धागे से बने पर्स और बोतल कवर भी बिक्री कर रही हैं l करमा यंग ज़ूम बताती हैं कि बिहार आने का मकसद बिहार के जीविका दीदियों की सफलता को देखने, उनसे सीखने और यहाँ के हस्तशिल्प और लोक कला के बारे में जानकारी लेनी है l करमा यंग ज़ूम अपना स्टॉल अपने महिला सहयोगी डिकी को सौपकर दिन –भर किसी न किसी जीविका दीदी से व्यवसाय प्रबंधन और उनकी सफलता के गुर सीखती- समझती हैं l
करमा यंग ज़ूम बिहार आकर काफी खुश हैं और बताती हैं कि बिहार का शिल्प और संस्कृति काफी समृद्ध है और लिट्टी-चोखा एवं आचार का स्वाद काफी बढ़िया हैं l उनके अनुसार व्यवसाय प्रबंधन हेतु सीखने के लिए सरस मेला एक बेहतर मंच है l करमा यंग ज़ूम की तरह अन्य प्रदेशों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमी एक- दुसरे के उत्पादों से मुखातिब होती हैं और एक-दुसरे में मिलकर काफी खुश होती हैं l जीविका के सहयोग, मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहयोग से गरीबी के आगोश से बाहर निकलकर आर्थिक एवं सामजिक तौर पर सशक्त हुई ग्रामीण महिलाये सतत जीविकोपार्जन योजना के स्टॉल पर खुद द्वारा निर्मित कला कृतियों को लेकर उपस्थित हैं l सभी 130 स्टॉल पर ग्रामीण महिलाएं एक कुशल उद्यमी के तौर पर उपस्थित हैं और कैशलेश खरीददारी को भी बढ़ावा दे रही हैं l
बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा 12 सितंबर से दस दिनों के लिए आयोजित हैं l 21 सितम्बर 25 तक आयोजित मेला आगंतुकों के साथ ही देश भर के 22 राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण उद्यमियों को भी एक-दुसरे की सभ्यता, संस्कृति, स्वाद एवं संवाद से रूबरू करा रहा है l मेला में प्रवेश नि:शुल्क है l
सोमवार को सरस मेला में काफी संख्या में लोग आये और अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी करते हुए दीदी की रसोई समेत अन्य खाद्य पदार्थों के स्टॉल से विभिन्न प्रदेशों के देशी व्यंजनों एवं मिठाईयों का लुत्फ उठाया l
क्रेता और विक्रेता की सुविधा के लिए जीविका दीदियों द्वारा 2 ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित हैं l जहाँ रुपयों की जमा-निकासी हो रही है l
सेल्फी जोन, खिलौने और क्रत्रिम फूलों के स्टॉल आकर्षण के खास केंद्र बने हुए हैं l
रविवार को 26 लाख लाख 52 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है। 12 सितम्बर से जारी बिहार सरस मेला से तीन दिनों में 77 लाख रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हुई है l

