बुंदेली समागम समारोह के समापन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए विधानसभा अध्यक्ष।
भोपाल/मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)08 सितंबर।मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सोमवार को राजधानी में बुंदेलखंड की संस्कृति के संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही सामाजिक संस्था बुंदेली बौछार के आयोजन बुंदेली समागम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुंदेली बौछार के संस्थापक की सचिन चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक ‘ बागेश्वर धाम सरकार – का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बुंदेली बौछार बुंदेलीखंड के वैभव को पुर्नस्थापित करने एवं वहां की कला-संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
श्री तोमर ने कहा कि जैसे हमारे देश में विविधता में एकता है, उसी तरह से हमारे मध्यप्रदेश में भी विविधता में एकता के दर्शन होते हैं। एक तरफ मालवा की उर्वर माटी है….तो दूसरी तरफ विंध्य की पर्वत श्रंखला है। कही बुंदेलखंड की ऐतिहासिक भूमि है तो कहीं चंबल के वीर बीहड़ हैं। सभी की अपनी संस्कृति है, बोलियां है, परंपराए हैं, लेकिन यह विविधता होते हुए भी सभी मध्यप्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।
श्री तोमर ने कहा कि सामान्य तौर पर यह माना जाता है कि बुंदलखंड और चंबल मध्यप्रदेश के पिछड़े इलाके हैं, लेकिन मेरी मान्यता इसके विरुद्ध है। हर क्षेत्र अपने गुणों के कारण समृद्ध होता है। बुंदेलखंड की समृद्धता को अगर हम गहराई से देखे तो पाते है कि बुंदेलखंड की रत्नगर्भा माटी मातृभूमि के सच्चे सपूतों, वीरों, मूर्धन्य विद्वानों और कलाकारों की जननी रही है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, महाराजा छत्रसाल, आल्हा उदल जैसे शूरवीर योद्धा, गोस्वामी तुलसीदास जी, कवि पद्माकर, राष्ट्रकवि मैथिलि शरण गुप्त और डॉ. हरिसिंह गौर जैसे साहित्यकार-विद्वान इस भूमि से निकले हैं। बुंदेलखंड सही मायनों में रत्नगर्भा है, यहां हीरों की खान है, खनिज एवं वन संपदा का विपुल भंडार है। यह क्षेत्र कृषि एवं श्रम की दृष्टि से भी समृद्ध है।
श्री तोमर ने इस अवसर पर बुंदेलखंड में शिक्षा के विकास एवं सागर विश्वविद्यालय की स्थापना में डॉ. हरि सिंह गौर के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। श्री तोमर ने कहा कि बुंदेलखंड का महत्व प्रदेश के विकास में अद्वितीय है। बुंदेलखंडी बोली में अपनत्व की मिठास है।
श्री तोमर ने कहा कि कि बुंदेली बौछार न केवल कला संस्कृति तक ही सीमित है बल्कि यह बुंदेलखंड के युवाओं के कैरियर गाइडेंस, वहां की खेल प्रतिभाओं को आगे लाने और पर्यावरण जैसे विषयों पर भी कार्य कर रही है। आपका यह प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है।
कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया, राज शांडिल्य, बुंदेली बौछार के संस्थापक सचिन चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र तिवारी सहित कई गणमान्य जन, कलाकार-साहित्याकार उपस्थित थे।

