RKTV NEWS/अनिल सिंह 21 मई।भोपाल साहित्यिक एवम् सांस्कृतिक संस्था प्रभात् साहित्य परिषद् द्वारा ‘समय के स्वर’ के अन्तर्गत श्रीमती दुर्गारानी श्रीवास्तव भोपाल तथा श्री राहुल कुम्भकार ब्यावरा का काव्यपाठ एवम् विमर्श का आयोजन हिन्दी भवन के ‘नरेश मेहता’ कक्ष में श्री रामकिशोर ‘रवि’ की अध्यक्षता एवम् साहित्य मर्मज्ञ सुश्री कान्ति शुक्ला ‘उर्मि’ के मुख्यातिथ्य में तथा गज़लकार प्रदीप कश्यप के विशेषातिथ्य व डॉ अनिल शर्मा ‘मयंक’ के संचालन में किया गया। इस अवसर पर विगत काव्यगोष्ठी की सर्वश्रेष्ठ चयनित रचना हेतु श्री कृष्णदेव चतुर्वेदी को परिषद् द्वारा ‘सरस्वती प्रभा’ सम्मान् से अलंकृत किया गया तदुपरान्त काव्यपाठ करते हुये राहुल कुम्भकार ने पढ़ा…
“मैं मिट्टी के हवाले हो चुका हूं,
जो करना है वो, अब मिट्टी करेगी!
और
बना लिए हैं बहुत से रस्ते, मगर ये रस्ते अलग नहीं थे,
हम आज क्यूँ बंट गए हैं इतना, हमारे पुरखे अलग नहीं थे। वहीं दुर्गारानी श्रीवास्तव ने पढ़ा- ‘प्रकृति माँग रही वरदान, जिसका खाया अन्न पिया जल, तब तो हुये जवान; मैं तो नदिया हूँ, इठलाती बल खाती चलूँ, पिया सागर से मिलना है गुनगुनाती चलूँ। उक्त दोनों रचनाकारों की समीक्षा करते हुये चरणजीत सिंह कुकरेजा ने कहा-‘जीवन की सारी विषमताओं को सकारात्मक नजरिये से देखना और आशावादी बनने का सन्देश इनकी रचनाओं में नजर आता है। वहीं अशोक व्यग्र ने समीक्षा करते हुये कहा कि भावपक्ष समृद्ध होते हुये भी शिल्प पक्ष में सुधार अपेक्षित है। अन्त में सन्स्था के संरक्षक अशोक निर्मल ने सभी का आभार व्यक्त किया।
