
उज्जैन/ मध्यप्रदेश( अविनाश चतुर्वेदी) 08 अगस्त।
मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन में श्रावण महोत्सव 2025 में नियोजित शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य से नटराज श्री महाकालेश्वर की आराधना में देश भर से प्रख्यात कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति द्वारा इस वर्ष 2025 में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी 20 वॉ अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव “शिवसंभवम” 2025 का आयोजन किया जा रहा हैं।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक श्री प्रथम कौशिक ने बताया कि 12 जुलाई 2025 से प्रारभ हुए 20 वे अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2025 का आयोजन श्री महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय सभागृह, जयसिंह पुरा उज्जैन में शाम 7 बजे किया जा रहा है |
उन्होंने बताया है कि कला साधकों के इस प्रस्तुति समागम में 09 अगस्त 2025 शनिवार को कोलकता की सुश्री अद्रिजा बसु का शास्त्रीय गायन, गोवहाटी के शुभांकर हजारिका का सितार वादन व नईदिल्ली के पद्मश्री गुरु जयराम राव व समूह के कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुातियॉ सम्मिलित हैं।
अद्रिजा बासु ने बहुत कम उम्र में अपने दादा, प्रसिद्ध गायक आचार्य रामकृष्ण बासु के मार्गदर्शन में इन्दौर घराने से अपनी संगीत यात्रा शुरू की। आगे चलकर आपने आचार्य जयंत बोस, अपने पति एलिक सेनगुप्ता(जयपुर-ग्वालियर घराना) और पद्मश्री उल्हास कशालकर से प्रशिक्षण लिसेनगुप्त “सर्वश्रेष्ठ महिला शास्त्रीय गायिका” (भारत संस्कृति उत्सव, 2017), “युव “युवा रत्न पुरस्कार” (2016), “गणवर्धन पुरस्कार” (2018), “सुर रत्न पुरस्कार” (2020) सहित अनेकों सम्मानों से सम्मानित किया है। आपने स्पिक मैके इंटरनेशनल कन्वेंशन, स्वर-मल्हार फाउन्डेशन, भारतीय संग्रहालय कोलकाता, और जर्मनी के अनेकों सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति दी है। आप स्पिक मैके और आकाशवाणी कोलकाता की सूचीबद्ध कलाकार हैं तथा देश-विदेश में शास्त्रीय गायन की सफल प्रस्तुतियाँ दे चुकी हैं।
शुभांकर हजारिका ने बाल्यकाल से ही अपने परिवार से संगीत की शिक्षा पाई। आपने पं. विष्णुलाल नाग से सितार वादन की परंपरागत शिक्षा ली व संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार से राष्ट्रीय स्कॉलरशिप प्राप्त की। आपको सूर-श्रवण सम्मान (उड़ीसा), सुरसिंगार सम्मान (मुंबई), और राष्ट्रीय युवा उत्सव में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है। आप आई.टी.सी. संगीत रिसर्च अकादमी, कोलकाता के प्रशिक्ष रह चुके हैं और देशभर के 1000 से अधिक मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं। आपकी प्रस्तुतियाँ संगीत नाटक अकादमी, इंदिरा गांधी संग्रहालय, एन.ई.सी. सी गोवाहाटी, यूनाइटेड ग्रेड कमीशन (UGC) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हो चुकी हैं। आप आकाशवाणी व दूरदर्शन के नियमित कलाकार हैं।
पद्मश्री गुरु जयराम राव कुचिपुड़ी नृत्य शैली के प्रमुख गुरुओं और कलाकारों में से एक हैं। आंध्र प्रदेश के पारंपरिक कलाकार परिवार से आने वाले जयराम राव ने बचपन से गुरु-शिष्य परंपरा में प्रशिक्षण लिया। सिद्धेन्द्र कला क्षेत्र से स्नातक होने के बाद आपने प्रसिद्ध गुरु डॉ. वेम्पति चिन्ना सत्यं से गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। दिल्ली में आपने आपने कुचिपुड़ी विद्यालय की स्थापना की और सैकड़ों विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया। आपकी प्रसिद्ध शिष्याओं में स्वप्ना सुंदर, मीनाक्षी शेषाद्रि, वनश्री राव (पत्नी), अरुणिमा कुमार, मीनू ठाकुर आदि शामिल हैं। आपने पारंपरिक शैली में नवाचार जोड़ते हुए मंचीय प्रस्तुतियों को नई ऊँचाई दी। आपको पद्मश्री (2004), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार(1999), इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार, दिल्ली राज्य पुरस्कार, आंध्र प्रदेश सम्मान जैसे अनेकों प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। आप मानव संसाधन मंत्रालय की कुचिपुड़ी विशेषज्ञ समिति के सदस्य और वरिष्ठ फेलोशिप धारक भी हैं।
