
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)24 जून।स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री एवं जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान-दिवस पर अखिल भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य भारतभूषण पाण्डेय ने सोमवार को कहा कि डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी महान शिक्षाविद,कुशल संगठक और प्रशासक थे। तैंतीस वर्ष की छोटी आयु में वे कलकत्ता (अब कोलकाता) विश्वविद्यालय के कुलपति बने। बंगाल विधान परिषद के सदस्य, बंगाल के वित्त मंत्री, संविधान सभा के सदस्य तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में डॉ मुखर्जी द्वारा देश की की गई सेवाएं अविस्मरणीय हैं। देशहित के लिए मंत्री पद से त्यागपत्र देकर नेहरूवादी नीतियों का राष्ट्रवादी-यथार्थवादी विकल्प जनसंघ का निर्माण और इसके द्वारा कश्मीर आन्दोलन से पूरे देश की चेतना जगाई तथा इसकी रक्षा के लिए श्रीनगर जेल में आत्मोसर्ग कर दिया। आचार्य भारतभूषण ने कहा कि जनसंघ का इतिहास आन्दोलन और बलिदान से भरा हुआ है। देशहित के लिए संघर्षरत रहना ही जनसंघ का परिचय है। उन्होंने कहा कि जनसंघ के कार्यकर्ताओं को हार-जीत की चिंता नहीं होती है।वे अपने विशिष्ट चरित्र-चिंतन के बल पर निरंतर क्षेत्र में सक्रिय तथा सेवारत रहते हैं।आधे पंजाब,आधे बंगाल और जम्मू और कश्मीर की रक्षा के लिए डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी हमेशा याद किए जाएंगे। जनसंघ अध्यक्ष ने कहा कि जनसंघ ही डॉ मुखर्जी का एकमात्र जीवित स्मारक है जिसे मजबूत करना डॉ मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। महासचिव राकेश गुरखा और बी के रमनारेड्डी ने डॉ मुखर्जी को एक दूरदर्शी राजनेता तथा भारतमाता का सच्चा सपूत बतलाते हुए कहा कि आज की केंद्र सरकार भी डॉ मुखर्जी और जनसंघ की नीतियों का लाभ ले रही है।कोषाध्यक्ष अनिल शर्मा, प्रमोद सोती और सचिव जगदीश शास्त्री ने कहा कि जनसंघ द्वारा आज बलिदान-दिवस से 21 अक्टूबर स्थापना-दिवस तक समर्पण-पर्व मनाया जाएगा जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति से दस रुपए की सहायता तथा दस वोट का आग्रह किया जाएगा। स्वागत भाषण गोपाल भाई पटेल, संचालन जगदीश शास्त्री तथा धन्यवाद ज्ञापन वैद्य मोहन मठपाल ने किया। इस अवसर पर एम सुधाकर चौधरी, देश कुमार कौशिक, आनन्द गिरि जी महाराज, मुकेश पटेल,पं प्रेम शंकर कौशिक, संतोष तिवारी, मुकेश कुमार डॉ रवि श्रीवास आदि प्रमुख लोगों ने डॉ मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा जनसंघ को मजबूत करने का संकल्प लिया।
