इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति ने छात्रों, संकाय सदस्यों व शुभचिंतकों को दिया संदेश।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 14 मई। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डाॅ. लवली शर्मा ने अपने संदेश में कहा है – कुलपति के रूप में आप सभी को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है। यह विश्वविद्यालय भारतीय कला और संस्कृति का एक गौरवशाली केंद्र रहा है, जिसने पीढ़ियों से कलाकारों, विद्वानों और सांस्कृतिक दूतों को तैयार किया है, जो हमारी परंपराओं को उत्कृष्टता के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। आज जब हम भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, मेरा प्रमुख उद्देश्य विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों तक पहुंचाना है। हमारे विद्यार्थियों को केवल भारतीय संगीत एवं ललित कलाओं की गहरी समझ ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने की क्षमता भी प्राप्त होनी चाहिए। मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब प्रतिभा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से पोषित किया जाता है, तो वह वैश्विक पहचान प्राप्त करती है। हम एक ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो छात्र-केंद्रित हो, अनुसंधान पर आधारित हो और सृजनात्मक सोच को प्रोत्साहित करता हो। हमारी शिक्षण पद्धति परंपरा में रची-बसी रहेगी, साथ ही नवीन विचारों और रचनात्मकता का स्वागत करेगी। “सर्वे सन्तु निरामयाः” के हमारे आदर्श वाक्य के अनुरूप, हम ऐसे खुले मन और संवेदनशील हृदयों का निर्माण करना चाहते हैं, जो सभी कलाओं में समरसता और संतुलन को अपनाएं। मैं हमारे सम्माननीय संकायजनों से भी आग्रह करती हूं कि वे निरंतर अपने ज्ञान को अद्यतन करें, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से संवाद करें, और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। हमें न केवल अपनी समृद्ध परंपरा को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करना है, बल्कि एक ऐसा उदाहरण स्थापित करना है जिससे हमारे देश की कलात्मक विरासत की गहराई, अनुशासन और विविधता उजागर हो सके। आइए, हम सभी मिलकर इस विश्वविद्यालय को कलाओं का एक तीर्थस्थल बनाएं- जहां सृजनात्मकता फले-फूले, परंपरा का सम्मान हो, और उत्कृष्टता हमारी पहचान बने।

