इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में चल रहा है दस दिवसीय समर कैंप।

इच्छुक बच्चों को कला का बेहतर ज्ञान लेने हेतु विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने की बात कही।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 11 मई। अंचल के नन्हें बच्चों की रचनात्मकता व गीत-संगीत के प्रति उनकी रुचि को बेहतर दिशा प्रदान करने के लिए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में आयोजित 10 दिवसीय समर कैंप का कुलपति प्रो डॉ. लवली शर्मा ने निरीक्षण किया। वे सुबह में नृत्य संकाय अंतर्गत कथक व भरतनाट्यम विभाग पहुंचीं, जहां शिक्षकों सहित अतिथि प्राध्यापकों द्वारा नन्हें बच्चों को नृत्य की शिक्षा दी जा रही थी। कुलपति डॉ. शर्मा ने बच्चों से चर्चा की और मन लगाकर अध्ययन करने की बात कही। इसके पश्चात वे संगीत संकाय अंतर्गत गायन विभाग एवं अवनद्ध वाद्य विभाग पहुंचीं। गायन विभाग में बच्चों को गीत-संगीत तथा अवनद्ध वाद्य विभाग में तबला वादन की जानकारी जा रही थी।
डॉ. शर्मा ने संगीत संकाय के अधिष्ठाता व अवनद्ध वाद्य विभाग के सहायक प्राध्यापक से चर्चा कर बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने की बात कही। इसके बाद मूर्तिकला विभाग पहुंचकर नन्हें बच्चों द्वारा माटीकला के तहत मिट्टी से बनायी गयीं विभिन्न कलाकृतियों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और बच्चों को प्रोत्साहित किया। चित्रकला विभाग में नन्हें चित्रकारों द्वारा बनायी गयी चित्रकारी का अवलोकन किया, जहां बच्चों ने अपनी रचनात्मक गतिविधियों से विभिन्न कलाकृतियां उकेरी थीं। शिविर में अपना सहयोग प्रदान कर रहे सभी शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों से कुलपति डॉ. शर्मा ने कहा कि सभी छात्रों को बेहतर से बेहतर शिक्षा प्रदान कर उनकी कला को निखारें।
शिविर में पंजीकृत सभी बच्चे गीत-संगीत व विभिन्न कलाओं की शिक्षा लेने में रुचि ले रहे हैं और सुबह से शिविर में पहुंच रहे हैं। शिविर में बच्चों की भीड़ यह बताती है कि क्षेत्र के अधिकतर लोग कला से जुड़ना चाहते हैं परंतु इससे पहले उन्हें बेहतर स्थान नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण उनकी कलाएं दम तोड़ती जा रही थीं। परंतु विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. शर्मा के निर्देशन में नवाचार के तहत समर कैंप का आयोजन किया गया, जिससे इन नन्हें कलाकारों को उनके अंदर मौजूद कलाओं का विस्तार करने के लिए बेहतर स्थान मिला है। इस शिविर के माध्यम से नन्हें कलाकार बारीकी से विभिन्न कलाओं का गुर सीख रहे हैं।

