मजदूर विरोधी है मोदी सरकार 100 वर्षो की लड़ाई में मिले श्रम अधिकार को किया झटके में खत्म! 8 के बजाय 12 घंटे के काम का शोषण: कयामुद्दीन अंसारी
RKTV NEWS/अनिल सिंह,02 अप्रैल। 44 को 4 में बदलने वाले राजनीतिक गणितीय सिद्धांत को परिभाषित करते हुए कल आरा के रेलवे स्टेशन परिसर में मजदूर दिवस के अवसर पर अपनी पार्टी माले द्वारा आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले राज्य कमिटी के सदस्य कयामुद्दीन अंसारी ने मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए मोदी सरकार को मजदूर विरोधी बताया।अपनी विरोधीय टिप्पणी में श्री अंसारी ने कोरोना काल में जहां देश स्तर पर सभी वर्गो के मजदूरों के जीवन यापन की समस्या उत्पन्न हुई थी। भारी संख्या में मजदूरों की छटनी की जा रही थी और कामों से भी निकाला जा रहा था। उस समय भी मोदी सरकार ने उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के हित में मजदूरों का साथ न देकर सैकड़ो वर्षो की लड़ाई पश्चात प्राप्त मजदूरों को श्रम कानून के अधिकार तहत 8 घंटे की सेवा के प्रावधान जिसमे 7 घंटे काम और 1 घंटे आराम को खत्म कर दिया गया और नया नियम 12 घंटे का लागू करा दिया गया जो मजदूर विरोधी है और दुर्भाग्यपूर्ण भी जिस हक को पाने के लिए कितने मजदूरों ने अपना बलिदान दिया उसे देश की मोदी सरकार द्वारा एक झटके में ही खत्म कर दिया गया और मजदूरों को उद्योगपतियों का गुलाम बना दिया गया।इस अवसर पर उन्होंने मजदूर शब्द की भी विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया की आम तौर पर मजदूर दिवस को लोग सिर्फ मकान बनाने वाले और बालू ढोने वाले लोगो के लिए ही इस दिवस को जानते है जबकि मजदूर दिवस वैसे हर लोगो का दिवस है जो शारीरिक,मानसिक या शैक्षणिक स्तर पर कार्य करते है और हमारी पार्टी और हमारी सोच उन सभी मजदूर भाइयों के हित की लड़ाई के लिए लड़ती आ रही है।उन्होंने मोदी सरकार से मजदूरों के हित में उनके द्वारा 44 श्रम कानूनों को 4 कोड कानूनों में तब्दील कर मजदूरों के हक के हनन की वापसी की मांग करते हुए पुनः 44 श्रम कानूनों को लागू करने की मांग भी की।


मजदूर विरोधी है मोदी सरकार 100 वर्षो की लड़ाई में मिले श्रम अधिकार को किया झटके में खत्म! 8 के बजाय 12 घंटे के काम का शोषण: कयामुद्दीन अंसारी