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भोजपुर:अभिलेख प्रदर्शनी आयोजित, विजय पताका फहराकर अंतिम सांस लेना कुंवर सिंह की वीरता का परिचायक :प्रो गांधी जी राय

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)24 अप्रैल।स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक धरोहर स्थल महाराजा कॉलेज आरा में बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय पटना एवं महाराजा कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में 22 अप्रैल को एक दिवसीय अभिलेख प्रदर्शनी कार्यक्रम प्राचार्य प्रो आलोक कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। पीजी इतिहास विभाग के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम सार्थक व सफल रहा।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व प्राचार्य प्रो गांधी जी राय, विशिष्ट अतिथि सीसीडीसी प्रो नरेंद्र प्रताप पालित, पूर्व पीजी हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो नरेंद्र सिंह नीरज, प्राचार्य प्रो आलोक कुमार,अभिलेखागार पटना के पदाधिकारीगण ,शिवकुमार मिश्र प्रभारी आदि की गरिमामय उपस्थिति में कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की गई।
सबसे पहले अतिथियों द्वारा कार्यालय में लगी बाबू साहब की तस्वीर पर ,तत्पश्चात कार्यालय के सामने बाबू कुंवर सिंह की प्रतिमा पर,इसके बाद कालेज के संस्थापक की प्रतिमा पर सामुहिक माल्यार्पण किया गया। मुख्य कार्यक्रम अभिलेख प्रदर्शनी का फीता काट कर उद्घाटन हुआ।सभागार में विधिवत दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ और कालेज द्वारा सभी अतिथियों को बुके,माला व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्य प्रो आलोक कुमार ने स्वागत भाषण, संचालन नेहा जी तथा धन्यवाद डा कमलेश कुमार सिंह ने किया।
अभिलेखागार से आयी डा रश्मि किरण ने प्रदर्शनी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कुंवर सिंह के वंश,जागीर, बहादुरी, रियासत तथा इन्हें पकड़ने के लिए पच्चीस हजार रुपए इनाम रखा गया था की जानकारी दी।युवा पीढ़ी को इतिहास को जानना और प्रेरणा लेने की जरूरत है। वहीं रामकुमार सिंह ने अभिलेख लेखन की पर वल देते हुए बताया की इसकी शुरुआत घर से करें। अर्थात अपने कागजात को सुरक्षित रखें।
प्रो नीरज सिंह ने अभिलेखागार द्वारा स्वतंत्रता आन्दोलन 1857 कालखंड के प्रमाणिक अभिलेख को प्रस्तुत कर इतिहास को जीवंत बना दिया है। इन्होंने कुंवर सिंह से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक तथ्यों को विस्तार से रखा और इन्हें सामाजिक सांस्कृतिक और सौहार्द का प्रतीक बताया। इनके समय में कभी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ।प्रो नरेंद्र प्रताप पालित ने कार्यक्रम को सफल बताते हुए इतिहास विभाग के सार्थक पहल की सराहना की। अध्यक्षीय भाषण में पूर्व प्राचार्य प्रो गांधी जी राय ने स्वतंत्रता आंदोलन के प्रथम महानायक के तमाम लड़ाइयों को तिथिवार विस्तार देते हुए विजयोत्सव तक की पूर्ण जानकारी दी। इन्होंने बताया कि प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन को साजिश के तहत सिपाही विद्रोह बताया। ईस्ट इंडिया कंपनी के के माध्यम से उद्योग, संस्कृति, धर्म के नाम पर लड़ाई, संपत्ति हडप नीति आदि के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत बनाई। इन्होंने बताया की
23 अप्रैल 1858 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम ‘विजयोत्सव दिवस’ है जिसका उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं है । अपना सर्वस्व बलिदान कर अंग्रेजों द्वारा ध्वस्त जगदीशपुर महल पर पुनः विजय पताका फहराकर उसमें अंतिम साँस लेना उनके अदम्य उत्साह एवं संकल्प का परिचायक है।
प्रो बलराम सिंह द्वारा लिखित 1857 के बिगुल गीत माला पुस्तक अभिलेखागार पदाधिकारी को डा दिनेश प्रसाद सिन्हा द्वारा गणमान्य अतिथियों के साथ हस्तगत किया गया।पुस्तक में कुंवर सिंह के ऐतिहासिक वीर गाथाओं पर गीत है।प्रमुख उपस्थिति में पूर्व प्राचार्य प्रो ओ पी राय,प्रो ओ पी केशरी,प्रो संजय कुमार,प्रो नियाज़ अहमद,प्रो अरुण कुमार ,डा रश्मि किरण,प्रो दीपक वर्धन, रमैया कुमार सिंह, अरूण कुमार आदि सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का हुजूम रहा। एनसीसी के कैडेट्स अतिथियों को स्कौट कर रहे थे।

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