पूर्व सांसद राम बख़्श वर्मा ने कहा ,”धोखे से देश की सत्ता पर गद्दार काबिज़ हो गए हैं”
नई दिल्ली/डॉ एम रहमतुल्लाह,20 अप्रैल।ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मशावरत (रजि.) के दिल्ली चैप्टर द्वारा “सामुदायिक सौहार्द्र को सशक्त बनाने की दिशा में” विषय पर एक कांफ्रेंस का आयोजन अबुल फ़ज़ल एनक्लेव स्थित मिल्ली मॉडल स्कूल में किया गया। इस अवसर पर देश की मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने समाज में बढ़ रही नफ़रत, असहिष्णुता और विघटनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट होने की ज़रूरत बताई।
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि देश इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है और इसे पटरी पर लाने की ज़िम्मेदारी हर नागरिक की है। उन्होंने कहा, “बंद कमरों में चर्चाएं कर लेने से कोई परिणाम नहीं निकलेगा। जनता के बीच जाकर संवाद और जागरूकता फैलाना समय की मांग है।”
वहीं, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद डॉ. राम बख़्श वर्मा ने कहा, “मैंने आरएसएस से अपने जीवन की शुरुआत की थी और बीजेपी में भी रहा, लेकिन अब मैं समाजवादी सोच को अपनाता हूं।” उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी का चरित्र दोहरा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में तानाशाही प्रवृत्तियों के सभी लक्षण मौजूद हैं। उन्होंने मीडिया और कॉरपोरेट गठजोड़ पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि “देश की सत्ता पर धोखे से गद्दार काबिज़ हो गए हैं।”
कार्यक्रम की शुरुआत क़ारी अब्दुल मन्नान की तिलावत-ए-कलामपाक से हुई। प्रारंभिक उद्बोधन में डॉ. ज़फ़रुल इस्लाम ख़ान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMMM, ने कुरान की आयत उद्धृत करते हुए कहा कि “हम सब आदम की औलाद हैं, मानवता ही हमारा असली धर्म है।” उन्होंने शांति और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।
अखिल भारतीय पीस मिशन के अध्यक्ष दया सिंह ने कहा कि “औरंगज़ेब को लेकर जो भ्रांतियां फैलाई गई हैं, वे इतिहास के साथ अन्याय हैं। मुसलमानों और अन्य धार्मिक समूहों को मिलकर एक अच्छा और मजबूत समाज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।”
कांफ्रेंस की अध्यक्षता कर रहे डॉ. एमडी थॉमस, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ हारमनी एंड पीस स्टडीज़, ने कहा कि “सभी धर्मों की अच्छाइयों को आत्मसात कर, त्योहारों में एक-दूसरे को शामिल कर ही हम सद्भावना का वातावरण बना सकते हैं।”
मौलाना मुफ़्ती अताउर रहमान क़ासमी ने अपने संबोधन में कहा कि “देश की मौजूदा स्थिति किसी एक दिन की नहीं, बल्कि सौ वर्षों से चल रही संगठित साज़िश का नतीजा है। लेकिन यह दौर भी समाप्त होगा, बशर्ते हम सब मिलकर प्रयास करें।”
एडवोकेट फ़िरोज़ ख़ान ग़ाज़ी ने धार्मिक राष्ट्रवाद पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “नफ़रत राष्ट्रवाद की जड़ों को खोखला कर देती है। पिछले 25 वर्षों में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ाकर राजनीतिक लाभ उठाया गया है।”
प्रो. मोहम्मद सुलैमान ने कहा कि “आज देश पूंजीपतियों और फासिस्ट शक्तियों के गठजोड़ से जकड़ा हुआ है। अब देश को बचाने की लड़ाई है और इसके लिए जान, माल और समय की कुर्बानी देनी होगी।”
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सुहैल अंजुम ने किया और धन्यवाद ज्ञापन सैयद मोहम्मद नूरुल्लाह, अध्यक्ष, AIMMM दिल्ली चैप्टर, ने दिया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और आमजन उपस्थित रहे, जिनमें मो. शमशुज्ज़ुहा, चौधरी रहीसुद्दीन, सैयदैन काज़मी, मो. सवालेह, यूसुफ़ हरियाली, मुसलेहुद्दीन आज़मी, शाहीन कौसर, अनवर अहमद, शादाब हुसैन, मोईन ख़ान, वाजिद अली, मो मोजम्मिल, ख़लीक़ुज्ज़मा, चौधरी जावेद, यासीन राणा, ज़फ़र अहमद, अतीक़ अहमद, नक़ीबुल ग़ौस, कमाल अख़तर, रफी अहमद, मौलाना अब्दुल क़ादिर, डॉ ज़ुबैर अहमद क़ासमी, हसीब अहमद, इफ़्तेख़ार अहमद, महमूद आज़मी, दिलशाद ख़ान आदि समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

