
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)17 अप्रैल।श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ मेदनीपुर द्वितीय दिवस पर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने भगवान के 24अवतारों की कथा कहते हुए कहा कि भगवान के अवतार के अनेक कारण बताए जाते है जैसे अनाचार, अत्याचार,पापाचार, धर्म की हानि आदि,पर मुख्य हेतु भक्तों पर भगवान की कृपा की वृष्टि करना ही है। आचार्य जी ने कहा,राक्षसों ,अन्यायियों,अत्याचारियों को तो अपने संकल्प से ही मार सकते ,मगर सेवरी का बैर खाना,विदुरानी का साग खाना, भक्तों के घर जा जाकर दर्शन आदि के लिए निराकार ब्रह्म नराकार रुप में अवतरित होते है।रामावतार की चर्चा करते हुऐ आचार्य जी ने कहा रसिकभक्त कहते हैंकि किसी अवतार में भगवान के माथे सेहरा नहीं बंधा ,न मउर चढ़ा, अतःविवाह ही मुख्य हेतु रहा.।आचार्य जी ने कहा श्रीकृष्णा के अवतार का हेतु भी अनेक है पर मुख्य हेतु त्रेतायुग में मिथलानियों और ऋषियों को दिया गया वचन,ऋषिकृषि हेतु गौपालन, पर्यावरण की सुरक्षा,विविध प्रदूषणों से निजात पाने का संदेश देना भी है।श्रीमद्भागवत का पाठ परायण पंडित त्रिगुणा जी महाराज,अमरमोहन तिवारी, पूजन अर्चन का कार्य संपादित कर रहे हैं। प्रबंध व्यवस्था में वैष्णव रामानुज दास की सन्निधि में चन्द्रमा सिंह, रामाशीष सिंह,राम अवध सिंह, रामप्रकाश सिंह , शिवपूजन महतो ,मोती पाल, विश्वकर्मा शर्मा ,अजित कुमार,अजय कुमार आदि भक्ति भाव से सक्रिय है।
