
RKTV NEWS/रांची ( झारखंड)14 अप्रैल। शुक्रवार को डी ए वी नीरजा सहाय कांके रांची के तत्वावधान में छात्र -छात्राओं के हित में वैदिक चेतना शिविर का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में कांके के विधायक सुरेश बैठा थे। इन्होंने कहा कि डी ए वी ग्रूप शिक्षा के क्षेत्र में अद्भुत कार्य कर रहा है। इसमें नैतिकता और मूल्य परक शिक्षा के साथ साथ कंप्यूटर और आधुनिक विज्ञान की भी शिक्षा दी जाती है। उन्होंने विधायक कोष से पुस्तकालय के नव निर्माण और खेल कूद के विकास के लिए स्टेडियम निर्माण हेतु आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डा जंग बहादुर पाण्डेय ने मुख्य वक्ता के रूप में वैदिक चेतना शिविर में बोलते हुए विद्यार्थियों को सफलता के मंत्र पर गहन प्रकाश डाला। डा पाण्डेय ने कहा कि नीति कहती है कि संसार में अपना कल्याण चाहने वालों को 7 जगहों पर बुलाए जाने पर भी वहाँ नहीं जाना चाहिए,चले गये तो वहां नहीं रहना चाहिए और रह गये तो किसी से नहीं कहना चाहिए -वेश्यालय,मदिरालय, जुआलय,हिंसालय,चिकित्सालय, न्यायालय और नरकालय और 7 जगहों पर बिना बुलाए भी वहां अवश्य जाना चाहिए, वहां रहना चाहिए और मौका मिले तो वहां कुछ न कुछ कहना चाहिए -विद्यालय, पुस्तकालय, अनाथालय, अनुसंधानालय,शिक्षकालय,देवालय और स्वर्गालय। इस देश का सौभाग्य या दुर्भाग्य यह है कि जहाँ हमें बिन बुलाए जाना चाहिए वहाँ जाने से कतराते हैं,कोई न कोई बहाना बनाते हैं और जहाँ नहीं जाना चाहिए, वहाँ बिन बुलाए चले जाते हैं।
डा जे बी पाण्डेय ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं के पास जोश है और बुजुर्गों के पास होश है।यदि युवा अपने जोश में बुजुर्गों के होश के साथ मिला दें, तो सफलता उनके चरण चूमेगी।उन्होंने छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए कहा कि चेतना जागृत करने एवं सफलता के लिए मन को नियंत्रित करना परमावश्यक है और मन को एकाग्र करने का एक अमोघ अस्र है-मन के पहले ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा नमन। नमन से मन का अहंकार दूर होगा और मन शांत होगा और मन शुभ कार्य की ओर अग्रसर होगा। मन के पीछे ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा मनन। एकाग्र होकर अध्ययन और चिंतन करने की क्रिया का नाम मनन है। नमन + मनन=ज्ञान की प्राप्ति=जीवन में मनोवांछित फल की प्राप्ति
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वाई बी एन विश्वविद्यालय रांची के चेयर मैन डा राम जी यादव ने कहा कि शिक्षा विकास का मूलाधार है।विद्यार्थियों को अपने माता पिता और गुरु की बात आंख मूंदकर मान लेनी चाहिए, इसी में उनका कल्याण है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए साईनाथ विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति डा एस पी अग्रवाल ने कहा कि विद्या से विनय,विनय से पात्रता, पात्रता से धन और धन से धर्म और सुख की प्राप्ति होती है।
राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय रांची के प्रो डा ओम प्रकाश ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए नियमित और एकाग्र चित्त अध्ययन अपेक्षित है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बी एच यू वाराणसी के अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका डा ब्यूटी यादव ने कहा कि विद्यार्थियों में संप्रेषण कौशल और भाषा का सम्यक् ज्ञान अपेक्षित है।अतिथियों का स्वागत विद्यालय की प्राचार्या डा किरण यादव ने, सरस्वती वंदना एवं स्वागत गान विद्यालय की छात्राओं ने, संचालन हिंदी शिक्षिका संगीता सिन्हा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत के विद्वान शिक्षक अखंड नारायण मिश्र ने किया।
