
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)14 अप्रैल।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा की अंगीभूत इकाई,बी प्लस ग्रेड से विभूषित जगजीवन कॉलेज आरा के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो अजय कुमार को मिथिला विश्वविद्यालय में स्थाई प्राचार्य हेतु बिहार राज्य चयन आयोग द्वारा चयनित किया गया है। बताते चलें की ये स्व प्रो रघुनाथ प्रसाद के पुत्र, दानापुर के स्थाई निवासी, पत्नी डा अनिता कुमारी पूर्व ए डी पी सी ,एक पुत्र,पुत्री का परिवार है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा मधुबनी और उच्च शिक्षा सीएम कालेज दरभंगा से हुई है।
स्थाई प्राचार्य चयनित होने पर प्रो अजय कुमार से पत्रकार डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने विचारों को संकलित किया है।इन्होंने सबसे पहले प्राचार्य की बहाली पर बिहार सरकार की सकारात्मक पहल, चयन आयोग द्वारा पारदर्शिता के साथ कम समय में परिणाम घोषित करना और विवि मे स्थान देना,अति सराहनीय है। 2003 में मेरी प्रथम नियुक्ति जेजे कॉलेज मनोविज्ञान विभाग में हुई और तब से वर्तमान तक विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हूं। शैक्षणिक कार्यों के अतिरिक्त कॉलेज में कोषेक्षक, कुलानुशासक,लीगल, वोकेशनल, आइक्यूएसी, परामर्श केंद्र एवं सलाहकार समिति आदि पदों पर सेवा देता रहा हूं। खेलकूद, एनसीसी ,एनएसएस तथा कल्चरल एक्टिविटीज में मैं सदा सहयोगी रहा हूं ।अब तक दस पी-एच डी अवार्ड हो चुके हैं और पांच का थेसिस जमा होने का अंतिम चरण है, पांच विभागीय पुस्तके प्रकाशित है। 50 लेख राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित है तथा 50 से ज्यादा राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में सम्मिलित हो चुका हूं। जगजीवन कॉलेज में दो राष्ट्रीय सेमिनार तथा एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार करवा चुका हूं।।तीन सेमिनार में मुख्य वक्ता भी रहा हूं ,सात संस्थाओं का आजीवन सदस्य हूं। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद से फैलोशिप अवार्डी हूं।अपनी प्राथमिकता के जवाब में इन्होंने कहा कि कॉलेज के शिक्षक ,कर्मचारी , सभी छात्र यूनियन के साथ बैठकर सहमति बनाएंगे की किस तरह से पठन-पाठन से लेकर विकास का कार्य अच्छे ढंग से हो।नई शिक्षा नीति की पूर्ण जानकारी देना ,नवाचार, वोकेशनल कोर्स , खेलकूद, कल्चरल,
एनसीसी ,एनएसएस आदि को भी बढ़ावा देना है। विभिन्न विषयों के द्वारा सेमिनार, व्याख्यान ,प्रदर्शनी ,तथा प्रयोगशालाओं को जीवंत बनाना, एलुमनी संगठन के लिए भी कोशिश करना है।छात्र-छात्राओं की उपस्थिति और शिक्षकों की कमी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।अच्छे अ.प्रा.शिक्षको को भी अनुमति के आधार पर विषय विशेषज्ञ का सहयोग लिया जा सकता है। इन्होंने बताया कि पहले प्रिंसिपल के साथ मिलकर कार्य करते थे अब 22 वर्षों के अनुभव को कालेज और विद्यार्थियों की सेवा और विकास में लगायेगे।
