
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)28 मार्च। गौरीशंकर पब्लिक स्कूल रोड, ब्रह्मपुरधाम आशा भवन के प्रांगण मेआयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञमें श्रीमद्भागवत के दशम् स्कंध की रसमयी कथा को विस्तार करते हुए उपनिषद् शैली में कहा कि माखन चोरी का रहस्य यह है कि माखन कोमल ,स्वचछ और निर्मल होता है,भगवान को निर्मलता, स्चच्छता प्रिय है।मृदा भक्षण का रहस्य है कि पृथ्वी क्षमाशील है,अब आगे लीलाओं में शाखाओं से गलती हो सकती है,अतः क्षमा का गुण धारण कर रहे हैं,भगवान के अन्दर ब्रम्हांड है ,इसकेअन्दर रहने वाले भक्तों को ब्रजरस का,ब्रज के भक्तों के चरण धूलि का पान करा रहे है,अब श्रीकृष्ण रजोगुणी लीला भी करेंगे अतःरज का भक्षण किया या पहले पूतना के स्तन का हलाहल पान किया अब मिट्टी खाकर मानो प्राकृतिक चिकित्सा कर रहे है। आगे नलकूबर और मणिग्रीव के उद्धार की कथा कहते हुए कहा कि बच्चों का परिवरिश ठीक से नहीं हुआ तो वो उदंड,संस्करहीन हो जाएंगे, जरूरत से ज्यादा धन अपने आप में बुराई है,धन का अहंकार बड़ा ही नशीला है ,भांग धतुरा खाने से नशा होता पर धन प्राप्त होने से अहंकार का नशा में मानव पागल है जाता है। कलियां दह में रह रहे नाग का मानमर्दन करने का मतलब है भगवान के सामने किसी का अहंकार नहीं चलता, यमुना जी कलियां नाग के विष से प्रदूषित होगयी थी जिसे प्रदूषण मुक्त कर दुनिया को संदेश दिया जलाशयों को प्रदूषण मुक्त करना होगा,जल ही जीवन है।श्रीकृष्ण द्वारा गाय बछड़ो की चरवाही करने का संदेश यह है कि भारत कृषि प्रधान राष्ट्र है,कृषि का आधार गाय है, गाय बचेगी तभी मानवता और भारतीयता बचेगी। गौवर्धन पूजन की कथा कहते हुए कहाकि जीवमात्र की रक्षा पर्यावणरक्षा में निहित है,पहाड़, प्रकृति से छेड़छाड बंद होना चाहिए अन्यथा प्रकृति किसी को नहीं बकसेगी।
