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शास्त्रीय भाषा को मिलने वाले लाभ।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 03 फ़रवरी।शास्त्रीय भाषाओं के रूप में अधिसूचित भाषाओं को उपलब्ध सहायता में शास्त्रीय भाषाओं में पुरस्कार, शास्त्रीय भाषाओं में अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में व्यावसायिक पीठों का सृजन शामिल है।
भारत सरकार ने पहले निम्नलिखित भाषाओं को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में अधिसूचित किया था:

तमिल, 2004

संस्कृत, 2005

तेलुगु, 2008

कन्नड़, 2008

मलयालम, 2013

ओडिया, 2014

शिक्षा मंत्रालय, मैसूर स्थित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के माध्यम से शास्त्रीय भाषाओं सहित सभी भारतीय भाषाओं के प्रचार और विकास की दिशा में काम करता है। इन भाषाओं से संबंधित शोध, दस्तावेज़ीकरण और विद्वत्तापूर्ण गतिविधियों को समर्थन देने के लिए विभिन्न संस्थान और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं:

तमिल: 2008 में स्थापित केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी), चेन्नई, शास्त्रीय तमिल के प्रचार और विकास के लिए समर्पित है।

संस्कृत: भारत सरकार तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों- केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली), श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) और राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (तिरुपति) के माध्यम से संस्कृत को बढ़ावा देती है। संस्कृत शिक्षा और शोध को मजबूत करने के लिए इन विश्वविद्यालयों को 2020 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था।

तेलुगु: शास्त्रीय तेलुगु में अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र नेल्लोर, आंध्र प्रदेश में कार्य करता है।

कन्नड़: शास्त्रीय कन्नड़ अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र मैसूर, कर्नाटक में स्थित है।

मलयालम: शास्त्रीय मलयालम अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र, तिरुर, मलप्पुरम, केरल से संचालित होता है।

ओडिया: शास्त्रीय ओडिया अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित है।

इसके अलावा, हाल ही में सरकार ने 04 अक्टूबर 2024 के राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली जैसी 5 और भाषाओं को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में अधिसूचित किया है।
यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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