
RKTV NEWS/ भोपाल से रीडिंग(इंग्लैंड) 11 जनवरी। भोपाल में शानदार लॉन्च के बाद, लेखक ऋतेश निगम की श्रीमद्भगवद् स्वगीता ने अब इंग्लैंड में अपनी जगह बनाई है। मध्य प्रदेश के एनआरआई की संस्था फ्रेंड्स ऑफ एमपी (FOMP) के रीडिंग चैप्टर ने इस अनूठी किताब पर एक खास चर्चा का आयोजन किया। FOMP एक ऐसी संस्था है जो मध्य प्रदेश और विदेश के बीच सेतु का काम करती है और राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त है।
पिछले महीने भोपाल में स्वगीता का लॉन्च एक बड़े समारोह में हुआ था, जिसमें प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान पाठक सर ने किताब का विमोचन किया था। अब इंग्लैंड में हुए इस कार्यक्रम में ऋतेश ने बताया कि कैसे इंग्लैंड में रहते हुए उन्हें गीता को जर्नल के रूप में प्रस्तुत करने का विचार आया। पिछले 15 सालों से रोज एक श्लोक लिखने की उनकी साधना ने इस किताब को जन्म दिया।
“स्वगीता हर किसी को अपनी गति से गीता को समझने और जीने का मौका देती है,” ऋतेश ने कहा। “यह किताब एक जर्नल की तरह है, जिसमें पाठक खुद लिख सकते हैं, चित्र बना सकते हैं, और गीता से अपना व्यक्तिगत नाता जोड़ सकते हैं।”
रीडिंग के कई परिवारों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भोपाल लॉन्च की तरह यहाँ भी लोगों ने मंडला को रंगा और श्लोकों पर अपने विचार लिखे। खास बात यह रही कि हर उम्र के लोगों ने इसमें रुचि दिखाई – बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस रचनात्मक गतिविधि में भाग लिया।
कार्यक्रम की सफलता के लिए ऋतेश ने FOMP के सदस्यों – नीरज पटेल, मनीष मालवीय, सुनय जेलावत, बिपिन गुप्ता और उनके परिवारों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। कई महिलाओं ने स्वगीता के माध्यम से गीता को समझने की अपनी यात्रा की कहानियां भी साझा कीं।
“स्वगीता की शुरुआत इंग्लैंड में हुई, भोपाल में इसका लॉन्च हुआ, और अब यह वापस इंग्लैंड आ गई है। गीता का संदेश दुनियाभर में फैल रहा है, यह बहुत खुशी की बात है,” ऋतेश ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पश्चिम में धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने और समझने का तरीका अलग है, और कैसे इससे प्रेरित होकर उन्होंने स्वगीता को एक अनूठे प्रारूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का समापन स्वगीता के इस खास श्लोक के साथ हुआ:
समस्त शुभम्, समस्त सुखम्, समस्त शान्तिम्
(सबका भला, सबका सुख, सबकी शांति)
जल्द ही स्वगीता के और कार्यक्रम इंग्लैंड के अन्य शहरों में भी होंगे। स्वगीता और आने वाले कार्यक्रमों की जानकारी के लिए www.SwaGita.com पर जाएं।
