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पटना:महान आध्यात्मिक चिंतक और दर्शन के कवि थे हृदय नारायण : डॉ अनिल सुलभ

जयंती पर वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद और युवा कवि सूर्य प्रकाश उपाध्याय को दिया गया स्मृति-सम्मान, कवियों ने दी गीतांजलि।

RKTV NEWS/पटना(बिहार )24अगस्त। भारतीय-चेतना के यशस्वी कवि हृदय नारायण एक महान आध्यात्मिक-चिंतक और दर्शन के कवि थे। वे हिन्दी-साहित्य के विनम्र साधु-पुरुष थे। लेखन की दृष्टि से भी और आचरण-व्यवहार और व्यक्तित्व से भी। उनकी आध्यात्मिक और साहित्यिक साधना साथ-साथ चली। संसार में रहते हुए भी उन्होंने एक संत की भाँति तपस्या की और सिद्धि भी प्राप्त की। वे भारतीय दर्शन के सिद्ध व्याख्याता भी थे।

यह बातें शनिवार को साहित्य सम्मेलन में, कल्याणोदय,पटना के सौजन्य से आयोजित जयंती-सह-स्मृति सम्मान समारोह और कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि हज़ारों वर्ष के तप पर आधारित चिंतन के गर्भ से भारतीय-दर्शन का प्रस्फुटन हुआ। हमारा चिंतन ‘सादा-जीवन और उच्च विचार’ का है। हमारे महान ऋषियों के मुख से निकला हमारा दर्शन मानव जीवन को विलासिता-पूर्ण नहीं, अपितु ‘आनंद-पूर्ण’ और ‘आनन्द-प्रद’बनाने की शिक्षा देता है। पुण्य-श्लोक हृदय जी ने अपने साहित्य में इन्हीं विचारों को अभिव्यक्ति दी है। उनकी ४० से अधिक पुस्तकों में उनका व्यापक दार्शनिक-चिंतन प्रकट हुआ है। ‘गीता’, ‘गांधी’ और’विवेकानंद’ पर उनके विशेष कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने अपने साहित्य और आचरण से सिखाया कि हमें निरन्तर कर्म करना चाहिए।

समारोह का उद्घाटन करते हुए, ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत चिकित्सक और पूर्व केंद्रीयमंत्री डा सी पी ठाकुर ने कहा कि हृदय नारायण जी पर महात्मा गाँधी का गहरा प्रभाव था। वे जीवन पर्यंत गीता और गाँधी का अनुसरण करते रहे। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों में भी भाग लिया।

स्वर्गीय हृदय नारायण के चिकित्सक पुत्रों डा निगम प्रकाश नारायण, डा निर्मल प्रकाश नारायण, डा निकुंज प्रकाश नारायण, पुत्रवधु डा संगीता नारायण , सतीश चंद्र प्रसाद तथा डा शाहिद ज़मील ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डा निगम ने कहा कि पिताजी यह मानते थे कि साहित्य केवल ऋंगार नहीं, सत्य की साधना है। साहित्य केवल विचारों में ही नहीं आचरण में भी लक्षित होनी चाहिए।

इस अवसर पर वरिष्ठ और विदुषी कवयित्री आराधना प्रसाद और युवा कवि सूर्य प्रकाश उपाध्याय को ‘प्रज्ञ चिंतक हृदय नारायण कल्याणी स्मृति-सम्मान’ से विभूषित किया गया। अध्यक्ष और मंचस्थ अतिथियों ने उन्हें सम्मान-स्वरूप वंदन-वस्त्र, स्मृति-भेंट, प्रशस्ति-पत्र के साथ पाँच-पाँच हज़ार रूपए की सम्मान-राशि प्रदान की।

इस अवसर पर, एक कवि-सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसका आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवयित्री डा पूनम आनन्द, पूनम सिन्हा श्रेयसी, चित्तरंजन लाल भारती, इरफ़ान अहमद बेलहारबी, सदानन्द प्रसाद, सुजाता मिश्र, ईं आनन्द किशोर मिश्र, इन्दुभूषण सिन्हा, आदित्य कुमार अश्क़, बिन्देश्वर प्रसाद गुप्त, आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी सुमधुर रचनाओं से काव्यांजलि अर्पित की। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन सम्मेलन के अर्थमंत्री ईं अशोक कुमार ने किया।

डा किरण नारायण, प्रो विनीता नारायण, शम्भूनाथ पाण्डेय, नीरव समदर्शी, कमल नयन श्रीवास्तव, डा प्रदीप कुमार सिन्हा, रूपेश कुमार, शशिभूषण रमनी, नीरा सिन्हा, सच्चिदानन्द शर्मा, अश्विनी कुमार, नवल किशोर सिंह, जीतन शर्मा समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

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