
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)28 जुलाई।आरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुदामा प्रसाद ने आज लोकसभा में शून्यकाल के तहत देश के विभिन्न राज्यों में छात्र-युवा आंदोलनों के दौरान पुलिस दमन, मनमानी गिरफ्तारियों, अत्यधिक बल प्रयोग तथा प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए फेसियल रिकग्निशन एवं फेसियल प्रोफाइलिंग जैसी तकनीकों के उपयोग का गंभीर मुद्दा उठाया।
सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि बिहार में 22 एवं 25 जुलाई को आयोजित छात्र-युवा प्रदर्शनों के बाद बड़ी संख्या में छात्रों, युवा कार्यकर्ताओं एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार लोगों में विभिन्न छात्र एवं युवा संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई छात्र घायल हुए तथा सिवान में पुलिस फायरिंग की घटना भी सामने आई, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।
उन्होंने ने कहा कि आंदोलन के बाद छात्र संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा बिहार सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई, जिसके बाद गिरफ्तार लोगों की रिहाई, मुकदमों की वापसी तथा दंडात्मक कार्रवाई समाप्त करने के संबंध में आदेश जारी किए जाने की सूचना मिली। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पुलिस की कथित ज्यादतियों, मनमानी गिरफ्तारियों और अवैध निगरानी की निष्पक्ष जांच अब भी आवश्यक है।
आगे उन्होंने लोकसभा में यह भी मुद्दा उठाया कि पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी छात्र-युवा आंदोलनों के दौरान गिरफ्तारियों, दमनात्मक कार्रवाइयों तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवकों के उत्पीड़न की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की पहचान और निगरानी के लिए फेसियल रिकग्निशन एवं फेसियल प्रोफाइलिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इनका उपयोग बिना स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त निगरानी के किया जाता है, तो यह नागरिकों की निजता, गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
सांसद सुदामा प्रसाद ने केंद्र सरकार से मांग की कि छात्र-युवा आंदोलनों के दौरान विभिन्न राज्यों में हुई पुलिस बर्बरता, मनमानी गिरफ्तारियों, अवैध निगरानी तथा फेसियल प्रोफाइलिंग के आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अवैध बल प्रयोग, मनमानी हिरासत और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
