RK TV News
खबरें
Breaking Newsसाहित्य

8-11 सितम्बर (विश्व व्यापार केन्द्र)

8-11 सितम्बर (विश्व व्यापार केन्द्र)

जहाँ संत कोलम्बास कभी पहुँचे थे भटके, महषि लिंकन रह गये कुटियाऽ डाले अटके के अटके,
कभी थे सागर को निहारते,
कभी हडसन की लहरे, आज वहीं हैं उनके वंशज अंट्टालिकाओं में ठहरे।

कहीं वाशिंगटन, कहीं न्युयार्क जहाँ मोती भरे टन के टन; बन बैठा है सौदागर मोति व शास्त्रों का, आज; कभी किसी को चिढ़ाता भी, बढ़ाते जाता है ब्याज का ब्याज।

ऐसे में दो अंट्टालिकाए, थी गर्दन से जुड़ी, पर नीचे और उपर थी अलग-अलग खड़ी, मुँह उपर किये, लगती थी, ब्योभ को चिढ़ाने पर थी पड़ी।

एक अवारा इतने में, एक के माथे पर दे मारा, चकरायी पर गिरी नहीं, रहा देखता वहीं अवारा।

अब वह दूसरे के कमर पर दे मारा, देखते-देखते गजब का, वह हो गयी निढाल, भराभरा कर सारा का सारा ।

पहली जो थी अब तक रोती, लुढ़क गयी वह भी, अट्टालिकाओं का हीं डंडा था,
पर झपट लिया था अवारा, गिरा देख भष्म हो गया,

आत्मघाती का कफन ओढ़ गया वह भी ।

आवारा अकेला नहीं था, दूसरा लगा खोजने घर पहरेदार का;
ये भी दौड़ा दूसरी ओर, दे मारा घर को, पहरेदार का ।

उसे लगा, पहरेदार, पहरेदार हीं नहीं,
वह तो विश्व व्यापार का रंगदार सुबेदार है;
समझा ये तो धन वालों का श्रृंगार है,
केवल पूंजीवाद का झंडेबदार है ।

सुबेदार का डंडा छीन, पहरेदार के घर घुस दे मारा डंडा,
सोचा था कारतुस भंडार में लगा आग करूँगा खंड-खंड ।

मचा कोलाहल क्या हुआ, किसने किया, कैसे किया;
घायल किया सुबेदार को और फिर कफन ओढ़ खुद सो गया ।

सुबेदार का स्वामी था छुट्टी पर,
सागर तट पर बीबी के चोटी में फूल, खोसता, कभी पानी फेंक उसके बदन भींगाता,
ऐसे में सटी कंचुकी से उभरे बदन को होगा निहारता ।

तभी खबर पाया हजारों स्वामी सुत मारे गये,
धसान में दब गये पहले शोक, फिर क्रोध में खुद शोक भी दब गया ।

क्रोधातुर स्वामी प्रण कर डाला, क्रुसेड तक का आहवान कर डाला ।

आवारों की आत्मा को जिंदा मुर्दा हाजिर करा के रहूंगा;
डुग्डुगी पिटवाया, जो साथ नहीं, आवारा समझा जायेगा ।

आतंकवाद विनाश अभियान का अश्वमेध यज्ञ हो गया शुरू;
डेढ़ माह तक न्योता घुमा,
हितनाते की आपसी बाते भी हो गयी शुरू ।

टेम्स मिला आमेजन से, बोलगा गंगा भी करने लगे पुछार;
मैं साथ लडुगाँ, मैं भी दूँगा साथ,
मैं बिना शर्त ही, लगने लगा गुहार;
देखना है इसी बहाने बीना शर्त या सरबस किसका होता है नैया पार ।

मैं जमी भी दूँगा, आकाश भी दूँगा, सरबस देने को तैयार ।
फिर नभ में लगी आग, धरती पर अंगारे गिरने लगे पास-पास,
तोरा-वोरा के बील में घुस छीपा कोई, बम पहुँच न पाया उसके पास।
फिर नभ से, बम के साथ, बिस्कुट की झोली गिरे लगे एक हीं साथ।

ध्वस्त हो गया तालिवान, पर पकड़ा ना पाया उमर, लादेन, दोनों भागे एक साथ।

आतंकवाद मिटाने के पहले विषमता ही मिटाना होगा,
पेंटागन का पहले, धैर्य काश्मिर को, दूरंगी चाल बदलना होगा।

एक ही तराजू पर अटल और मुशर्रफ के नहीं तौलना होगा;
आतंकवाद-आतंकवाद है, इसे जेहाद कहनेवाले का दंभ तोड़ना होगा।

रचनाकार डॉ कृष्ण दयाल सिंह
(उक्त कविता डॉ कृष्ण दयाल सिंह रचित नाटक और कविता संग्रह यथावत से ली गई है,लेखक वर्तमान में आरा के वरिष्ठपुरी में निवास करते है,संपर्क:9570805395)

Related posts

भोजपुर : ठनका गिरने से एक की मौत।

rktvnews

दुमका: उपायुक्त ने किया कुरवा स्थित सृष्टि पार्क का निरीक्षण।

rktvnews

चतरा:उपायुक्त रमेश घोलप ने जनता दरबार के माध्यम से आमजनों की समस्याएं सुनी।

rktvnews

उत्तराखंड : मुख्यमंत्री ने मंगलेश डंगवाल द्वारा रचित ‘‘श्री गणेश मंगलाचरण‘‘ का किया विमोचन।

rktvnews

उत्तराखंड: मुख्यमंत्री ने प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान की धर्मपत्नी के निधन पर गहरा शोक किया व्यक्त।

rktvnews

झारखंड:जुलूस मे नाचने वाले थाना प्रभारी के खिलाफ भाजपा पहुंची चुनाव आयोग।

rktvnews

Leave a Comment