गोरख पाण्डेय और भोलाजी आखिरी आदमी की संवेदना के कवि : अध्यक्ष जितेंद्र कुमार
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 फ़रवरी।स्थानीय नवादा थाना के करीब भेंडर जोन परिसर में जन कवि भोलाजी और गोरख पाण्डेय की स्मृति में जसम, आरा-भोजपुर ने ‘कउड़ा काव्य काव्यगोष्ठी’ का आयोजन किया।
‘मुक्ति की खुली निगाह’ उनवान वाली इस काव्य गोष्ठी में शहर के अनेक कवि-साहित्यकार, रंगकर्मियों ने हिस्सा लिया।
गोष्ठी में अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ लेखक व जसम के राज्य अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने प्रगतिशील जनवादी धारा के भीतर गोरख पाण्डेय की व्याप्ति और प्रभाव को गहरे में याद किया। उन्होंने कहा कि गोरख पाण्डेय की संवेदना को समझने के लिए समाज के आखिरी आदमी तक पहुँचना होगा। उन्हें सिर्फ ‘एक दिन राजा मरलें’ गीत से हीं नहीं बल्कि ‘बुआ के लिए’ और ‘कैथर कला की औरतें’ जैसी रचनाओं के सहारे भी समझने की कोशिश करनी होगी। जितेंद्र कुमार ने कवि भोला जी को अपने समय का कबीर कहा। उनकी अक्खड़ता और आम आदमी के प्रति समर्पण सराहनीय रहा है।उन्हों ने अपनी कविता ‘बेहाये का फूल’ का भी पाठ किया।
मंच से अध्यक्ष मंडल के सदस्य वरिष्ठ कहानीकार नीरज सिंह ने भी भोलाजी और गोरख पाण्डेय को याद किया। उन्होंने भोलाजी को एक सचेत कार्यकर्ता व कवि बताया। उन्होंने आज के दौर की विसंगतियों को रेखांकित करते हुए अपनी गजल सुनाई-
“एक दूजे के घर आना-जाना बंद हुआ
मिलना-जुलना गले लगाना बंद हुआ। ”
अध्यक्ष मंडल में शामिल प्रलेस के सदस्य रचनाकार प्रो. मृत्युंजय सिंह जेएनयू में रहते हुए गोरख पाण्डेय से जुड़ी यादें साझा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रहते हुए वहाँ के रचनाकारों ने उनके महत्व को नहीं समझा। निधन के बाद जब लोगों ने उन्हें पढा़-समझा तो फिर गोरख की प्रासंगिकता समझ में आई।
मृत्युंजय सिंह ने ‘महानगर के कवि’ शीर्षक अपनी कविता का भी पाठ किया। गोरख और भोलाजी से जुड़ी यादों को युवानीति के संस्थापक सदस्य, रंगकर्मी व जसम के साथी सुनील सरीन ने भी गहरी संवेदनशीलता के साथ याद किया।
बोकारो से आये कवि आर. पी. वर्मा ने नौकरी से अवकाश के बाद की सुखद स्थिति को व्यक्त करते हुए अपनी मगही और हिंदी कविताओं से सबका ध्यान खींचा। वहीं जसम के पूर्व राज्य सचिव कवि-आलोचक सुधीर सुमन ने गोरख और भोलाजी की एक-एक रचनाओं का पाठ किया तथा बताया कि शीघ्र ही उनके संपादन में भोलाजी पर एक संस्मरणों की किताब आनेवाली है।
कवि नीलांबुज सरोज ने गोरख के मशहूर गीत ‘एक दिन राजा मरलें’ को गाकर सुनाया। एक अन्य प्रसंग को जोड़ते हुए नीलांबुज ने कवि संतोष पटेल की कविता ‘कनकटही कप’ का भी पाठ किया। जसम आरा-भोजपुर के सचिव कवि सुमन कुमार सिंह ने अपने भोजपुरी गीत ‘फेरु नया साल’, गोरख का गीत ‘नेह के पाती’ और भोलाजी की कविता ‘पढ़निहार बुरबक’ को क्रमश: सुनाकर गोष्ठी में आये श्रोताओं को बाँधे रखा।
अन्य कवियों में डा. सिद्धनाथ सागर, कवि-कथाकार तथा दस्तक पत्रिका के संपादक रामयश अविकल, राजाराम प्रियदर्शी,जनार्दन मिश्र, ओमप्रकाश मिश्र, रणधीर राणा, डा. सिद्धनाथ सागर, जितेंद्र विद्रोही, सुनील श्रीवास्तव आदि ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।
रचनाकारों के अतिरिक्त पचास से अधिक लोगों की उपस्थिति देर तक बनी रही। उपस्थित लोगों में अमित मेहता, विक्रांत कुमार, धनंजय सिंह, अनिल वर्मा, अंशु राजा,पप्पूजी गुप्ता, दिलराज प्रीतम, भोलाजी के पुत्र मंगल माही, आइसा के रौशन कुशवाहा, माले के दीनाजी, कर्मचारी संगठन के वरिष्ठ साथी यदुनंदन चौधरी, सुमन जी, पत्रकार रैना सिंह, बब्लू गुप्ता, विनोद चंद्रवंशी, संजय कुमार, नीलेश कुमार गोलू आदि ने भी देर तक गोष्ठी में आये रचनाकारों को सुना।
धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक-पत्रकार शमशाद प्रेम ने किया। संचालन सुमन कुमार सिंह ने किया।

