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रामदास राही श्रद्धांजलि भाग- 3:भिखारी ठाकुर के नाट्य शैली को कुछ लोग लौंडा नाच कहते हैं ,इस शब्द से असहमत थे रामदास राही?

आरा/भोजपुर (अतुल प्रकाश)07 दिसंबर।जनहित परिवार पत्रिका के संपादक होने के नाते मुझे याद है वर्ष 2003 में 25 दिसंबर को नागरी प्रचारिणी सभागार में आयोजित सफल भोजपुरी महोत्सव में”भोजपुरी सपना”का महेंद्र मिश्र विशेषांक अंक प्रकाशित किया गया था। उसमें भोजपुरी के प्रथम उपन्यासकार रामनाथ पांडे रचित “महेंद्र मिश्र उपन्यास” के अंश को प्रकाशित किया गया था जिसमें भिखारी ठाकुर और महेंद्र मिश्र की प्रगाढ़ता का वर्णन किया गया था। उस अंश में एक जगह जिक्र था कि “भिखारी ठाकुर एक अच्छे नर्तक थे और वे महेंद्र मिश्र को अपना गुरु मानते हुए उनसे संगीत शिक्षा लेने के लिए उनके पास जाते थे। मुझे याद है कि जनहित परिवार पत्रिका में भिखारी ठाकुर को एक “अच्छा नर्तक” कहने मात्र पर रामदास राही ने पुरजोर विरोध किया था। हालांकि जनहित परिवार पत्रिका में भिखारी ठाकुर को लौंडा नाच करने वाले नचनिया के रूप में कभी नहीं कहा गया है फिर भी नर्तक मात्र करने से रामदास राही जी ने पुरजोर विरोध किया था उनका कहना था कि नर्तक कहने से नचनिया (लौंडा) का ही बोध होता है जिसे भोजपुरी समाज में अच्छा नहीं माना जाता।
उनका मानना था कि भिखारी ठाकुर के नाट्य शैली को बदनाम करने की साजिश है। लौंडा नाच से अश्लीलता का बोध होता है यह एक प्रकार से असामाजिक शब्द है। भिखारी ठाकुर के साथ इस शब्द का प्रयोग करना उचित नहीं है। हालांकि उनके इस बात से सभी सहमत नहीं होते। उनका कहना था कि भिखारी ठाकुर का नाटक सॉन्ग रूपक नाटक है। इस शब्द का प्रयोग करने वाले लोग धूर्त और मक्कार हैं। हां यह सच था कि उस समय महिलाएं नाट्य मंडली के साथ नहीं होती थी। उनका अभिनय पुरुष ही करते थे और यह विशेषता सिर्फ भिखारी ठाकुर के नाटकों के साथ नहीं है। पुरुषों के द्वारा महिलाओं का अभिनय उससे पहले से हो रहा था।
एक इंटरव्यू में भिखारी ठाकुर के नाट्य शैली को लौंडा नाच कहने वाला जेएनयू का एक शोधार्थी जैनेन्द्र के विषय में बताते हुए कहा कि वे मेरे दोस्त हैं जो कि महाथेथर हैं। उसने ही रामचंद्र माझी को पाँच हजार रुपया देकर दिल्ली में अश्लीलतापूर्वक नचवाया था। अभिनय और कला की बहुत-सी भाव भंगिमाएं होती है जिसका ज्ञान सबको नहीं है।
जगदीशचंद्र माथुर ने भिखारी ठाकुर को भरत मुनि के परंपरा का नाटककार कहा है और राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें अनगढ़ हीरा कहा।भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक योद्धा और साहित्य के धरोहर हैं।

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