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Category : आलेख

Breaking Newsआलेख

क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है? “सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद”।

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सोशल मीडिया के युग में भलाई और करुणा अब मौन संवेदनाएँ नहीं रहीं, वे कैमरे के फ्रेम में क़ैद होती जा रही हैं। आज अधिकांश...
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“इतिहास का बोझ: कब तक हमारी पीढ़ियाँ झुकती रहेंगी?”

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मुझे यह सोचकर पीड़ा होती है कि आज भी हमारे बच्चों को इतिहास के नाम पर मुग़ल शासकों की गाथाएँ पढ़ाई जाती हैं, जबकि चाणक्य,...
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“केसीसी के नाम पर चालबाज़ी: निजी बैंकों की शिकारी पूँजी और किसानों की लूट”।

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निजी बैंक किसानों को केसीसी योजना के तहत ऋण देते समय बीमा और पॉलिसियों के नाम पर चुपचाप उनके खातों से पैसे काट लेते हैं।...
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“प्रेस स्वतंत्रता दिवस: एक इतिहास, एक याद”।

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प्रेस की चुप्पी, रीलों का शोर: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ट्रेंडिंग टैग बन गया। RKTV NEWS/प्रियंका सौरभ,0 3 मई।प्रेस स्वतंत्रता दिवस अब औपचारिकता बनकर रह...
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“मैनेजमेंट के मखमली पर्दे के पीछे दम तोड़ती पत्रकारिता”।

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“PR मैनेजमेंट के चंगुल में फंसा आज का कलमकार, मैनेजर जी रहे लग्जरी लाइफ, पत्रकार टूटी बाइक पर”। RKTV NEWS/डॉ सत्यवान सौरभ,03 मई।आज की पत्रकारिता...
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अंततः देश में जाति जनगणना: प्रतिनिधित्व या पुनरुत्थान?

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भारत में दशकों से केवल अनुसूचित जातियों और जनजातियों की गिनती होती रही है, जबकि अन्य जातियाँ नीति निर्माण में अदृश्य रहीं। जाति जनगणना केवल...