
RKTV NEWS/भोपाल (मध्यप्रदेश)06 जनवरी। गुरुगोबिंद सिंह का 358 वा प्रकाश पर्व गुरुद्वारा दशमेश दरबार आनंद नगर में श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया ।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार मके अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग की मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर , विधायक भगवान दास सबनानी एवं हजारों श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के चरणों में माथा टेका।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर , विधायक भगवान दास सबनानी एवं समाज सेवी गुरुचरण सिंह अरोरा का गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र पाल सिंह गिल ने सम्मान किया।
इस अवसर पर मंत्री कृष्णा गौर ने अपने उद्बोधन में कहा की श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए अपना पूरा परिवार बलिदान कर दिया।
उनकी जयंती हम प्रकाश पर्व के रूप में मनाते हैं । उन्होंने कहा की हम जानते हैं की प्रकाश का अर्थ अंधकार से बाहर निकलकर सत्य एवं ईमानदारी का जीवन जीना है। हमें अपने जीवन को धर्म के प्रति कैसे समर्पित करना है, यह हमको उनके जीवन से प्रेरणा मिलती है।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने सन् 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की, जिससे खालसा पंथ ने सत्य और धर्म पर चलने की प्रेरणा संपूर्ण समाज को दी। यह पूरे राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।
उन्होंने कहा की श्री गुरुगोबिन्द सिंह जी के संदेश को हम ना केवल अपने जीवन में आत्मसात करेंगे बल्कि अपने आने वाली पीढ़ियों को भी सिखाने का काम करेंगे ।
यही उनके प्रति हमारी सच्ची भक्ति होगी। उन्होंने प्रकाश पर्व पर सभी प्रदेश वासियों को शुभकामनाएं दी।
रागी जत्था डा. हनमंत सिंह प्रचारक पटियाला पंजाब, भाई अमरजीत सिंह खालसा ढाड़ी जत्था अंबाला हरियाणा, गुरुद्वारा दशमेश दरबार आनंद नगर के ग्रंथी भाई केसर सिंह जी,ढाड़ी जत्था भाई अमरजीत सिंह खालसा अंबाला हरियाणा ने कहा की श्री गुरुगोबिन्द सिंह जी ने 9 साल की उम्र में हिंदू धर्म की रक्षा के लिए कश्मीर के पंडितों पंडित कृपा राम एवं अन्य पंडितों के सामने अपने पिता श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी से कहा की धर्म की रक्षा के लिए आप अपना बलिदान दें। श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने कश्मीरी पंडितों से कहा की बादशाह औरंगजेब को बोल दो की यदि गुरु तेग बहादुर सिंह जी को मुसलमान बना दो, तो हम सभी बन जायेंगे । तब श्री गुरु तेग बहादुर जी को बादशाह औरंगजेब ने दिल्ली के चांदनी चौक पर लाल किले के सामने जल्लाद जलालुद्दीन के हाथो श्री गुरु तेग बहादुर जी का सर धड़ से अलग कर दिया, एवं साथ में भाई मतीदास जी, भाई सतीदास जी एवं भाई दयालदास जी को भी तसीहे दे कर शहीद कर दिया।
श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया पर धर्म पर आंच नही आने दी।
श्री गुरुगोबिंद सिंह जी ने जबर और जुल्म के खिलाफ तलवार उठाई एवं 14 जंगें लड़ीं एवं अपना पूरा परिवार कुर्बान कर दिया। उनके अपने दो पुत्र (साहिबजादे) चमकौर की जंग में और दो छोटे पुत्र (साहिबजादे) सरहंद की दीवारों में जिंदा चुनवा जाकर शहीद हो गए। एवं उनकी माता ठंडे बुर्ज में शहीद हो गई।
जिसपर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा की इन पुत्रन के सीस पर वार दिए सुत चार, चार मुए तो क्या हुआ जीवित कई हजार ।।
श्री गुरु गोबिंद सिंह जी जबर एवं जुल्म के खिलाफ थे, वह किसी धर्म के खिलाफ नही थे।
उन्होंने कहा की सब सिक्खन को हुकुम है गुरु मान्यो ग्रंथ, गुरु ग्रंथ जी मानयो प्रगट गुर देह।।
उन्होंने नांदेड़ साहब महाराष्ट्र की पावन धरती पर तखत श्री हजूर साहेब पर गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरु गद्दी पर विराजमान किया एवं कहा की शबद गुरु श्री गुरुग्रंथ साहिब जी को ही मानना है।
इस अवसर पर गणमान्य नागरिकों में मध्य प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग एवं जनजाति विभाग की मंत्री कृष्णा गौर, विधायक भगवान दास सबनानी गुरुद्वारा दशमेश दरबार आनंद नगर के गुरुद्वारा अध्यक्ष जितेंद्र पाल सिंह गिल एवं समाज सेवी गुरुचरण सिंह अरोरा एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।
