
RKTV NEWS/व्यंग्य (राजेंद्र शर्मा) 12 नवंबर।आखिरकार, डोनाल्ड ट्रंप जी की व्हाइट हाउस में वापसी हो गयी। क्यों न होती। आखिरकार, मोदी जी के दोस्त हैं और वह भी पक्के वाले। उनकी भी घर वापसी नहीं होती, तो किस की होती? उनका बस चलता, तो उन्होंने तो पिछली बार ही घर वापसी कर ली होती, चार साल पहले। तब तो मोदी जी ने भी उनकी घर वापसी के लिए पूरा जोर लगाया था ; वहां टिके भारतीयों से ‘अब की बार ट्रंप सरकार’ का नारा तक लगवाया था। दुर्भाग्य से, चुनाव के नतीजे के बाद ट्रंप साहब की घर वापसी, जोर-जबर्दस्ती की घर वापसी मानी गयी। कैपीटल हिल पर चढ़ाई करने के लिए उनके भक्त तो अब तक केस भुगत रहे हैं और खुद ट्रंप साहब को भी घर वापसी के लिए चार साल इंतजार करना पड़ा। खैर! ट्रंप जी आखिरकार घर वापसी कर के माने। घर वापसी के मोदी जी के नारे को सच जो करना था। दोस्ती हो तो ऐसी!
पर विरोधी इस दोस्ताने को भी बुरी नजर लगाने की कोशिश कर रहे हैं। और कुछ नहीं मिला, तो ट्रंप जी का दोस्ती का टांका कहीं और जुड़वाने पर उतर आए हैं। कह रहे हैं कि चार साल तो मोदी जी ने डियर फ्रैंड डोनाल्ड की कोई खास खबर-सुध नहीं ली। उल्टे बाइडेन को डियर फ्रैंड कहकर बुलाना शुरू कर दिया था। और इस बार चुनाव में भी अब की बार ट्रंप सरकार का नारा लगवाना तो दूर रहा, चुनाव के टैप पर अमरीका जाकर भी, फ्रैंड डोनाल्ड से मुलाकात तक नहीं की ; बचकर निकल आए। यहां-वहां अपने भक्तों से डोनाल्ड की जीत के लिए यज्ञ वगैरह करा दिए, बस। ट्रंप ने भी ठान लिया कि मोदी से भी पक्का दोस्त बनाकर दिखाऊंगा। ट्विटर वाले एलन मस्क से दोस्ती, अब ट्रंप जी नहीं छोड़ेंगे। मस्क की दोस्ती वैसे भी टू इन वन है, दोस्ती की दोस्ती और चंदे का चंदा!
लेकिन, ये सब दुश्मनों की फैलायी अफवाहें हैं। दुनिया देखेगी कि जय और वीरू की ये जोड़ी, कुर्सी कायम रहने तक कायम रहेगी। मस्क की दोस्ती, मोदी जी की दोस्ती जगह नहीं ले सकती है। फिर अगर ट्रंप के पास मस्क की यारी है, तो अपने मोदी जी को भी अडानी से दोस्ती प्यारी है। ज्यादा ही हुआ, तो दोस्ती में हम दो हमारे दो मान लेंगे। पर ट्रंप जी और मोदी जी, ये दोस्ती नहीं छोड़ेंगे।

(व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और ‘लोकलहर’ के संपादक हैं।)
