
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 11अक्टूबर। सप्तम् कालरात्रि, अष्टम् महागौरी तथा नवम् सिद्धिदात्री की वंदना श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ की। घरों में लोगों ने कलश रख कर नवरात्र की पूजा की तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ पढ़ा। कई लोगों ने पंडित से दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाया। इसके अलावा दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में पूजा करने के लिए महिलाओं की कतार लगी रही। महिलाओं ने माॅ दुर्गा की पूजा अर्चना फूल, माला, फल, कुमकुम, सिंदूर, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से कर माॅ को चुनरी अथवा साड़ी चढ़ाया और अपने एवं अपने परिवार के सुख, सौभाग्य, समृद्धि एवं आरोग्य की कामना की। श्रद्धालु महिलाओं ने पूजा के बाद माॅ का खोंईछा भी भरा। पूजा पंडालों एवं मंदिरों में हो रहे वैदिक मंत्रोच्चार से माहौल भक्तिमय बन गया। भक्ति गीतों से गुंजायमान हुआ पटना। शाम और रात में माॅ के दर्शन और भव्य पूजा पंडालों तथा तरह-तरह के आकर्षक लाइटिंग को देखने के लिए सड़कों पर उमङ पड़े पटनावासी। आसपास के गाँवों, कस्बों और अन्य जगहों के लोग भी पटना के दुर्गा पूजा पंडालों और देवी दर्शन के लिए घूमने पहुँचे। ऐसा लगता है मानो दुल्हन की तरह सजी है राजधानी पटना। आयकर गोलंबर से डाकबंगला चौराहा तक और कदम कुआँ इलाका शाम होने के बाद श्रद्धालुओं एवं दर्शकों से खचाखच भर गया। पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
पुलिस प्रशासन और आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा माइकिंग कर लोगों को आगे बढ़ते रहने और भीङ नहीं लगाने की हिदायत दी जाती रही। पूजा पंडालों के आसपास और सड़कों के किनारे लगी दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। देवी दर्शन और पंडालों को घूमने के बाद लोगों ने दुकानों पर जमकर खाया पीया। छोला, चाट, चाउमीन, मोमो, गोलगप्पा, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, डोसा, चाय-कॉफी सहित अन्य खाने-पीने की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। मेले जैसा माहौल बना रहा। सड़कों पर भी चलना मुश्किल रहा। वाहनों की कौन कहे पैदल चलने पर भी धक्कम-धुक्का होता रहा। पैदल चलना भी दुभर हुआ। पुलिस प्रशासन द्वारा वाहनों को पंडालों में नहीं जाने देने से लोगों को काफी सहूलियत हुई और लोगों ने आराम से देवी दर्शन किया।
