
RKTV NEWS/उज्जैन (मध्यप्रदेश)03 अक्टूबर।धार्मिक नगरी उज्जैन में माता हरसिद्धि के धाम के बाद दूसरा शक्तिपीठ सुप्रसिद्ध गढ़कालिका मंदिर है। पुराणों में उल्लेख है कि मां शिप्रा नदी के तट के पास स्थित भैरव पर्वत पर माता सती के ओष्ट – होंठ गिरे थे। इसलिए इस जगह को भी शक्तिपीठ के समकक्ष ही माना जाता है। कथा है कि जिस समय रामचंद्रजी युद्ध में विजयी होकर अयोध्या जा रहे थे, वे रुद्रसागर तट के निकट ठहरे थे।
गढ़कालिका मंदिर में नवरात्र के बाद दशमी पर कपड़े के बनाए गए नरमुंड चढ़ाए जाते हैं।प्रसाद के रूप में दशहरे के दिन नींबू बांटा जाता है। इस मंदिर में तांत्रिक क्रिया के लिए कई तांत्रिक मंदिर में आते है। इन नौ दिनों में मां कालिका अपने भक्तों को अलग-अलग रूप में दर्शन देती है।
