
जगदीशपुर/भोजपुर(राकेश मंगल सिन्हा) 13 अगस्त। भोजपुर जिले के जगदीशपुर अनुमंडल के अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, जगदीशपुर के अधिवक्ता संघ का चुनाव परवान पर है। जगदीशपुर अधिवक्ता संघ का चुनाव 20 अगस्त को होना है। इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार और सचिव पद के लिए चार प्रत्याशी अपनी किस्मत चुनावी रण में आजमा रहे हैं। निवर्तमान अध्यक्ष जयकांत दूबे दोबारा इस बार भी अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हैं। अधिवक्ता जयकांत दूबे ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि सदस्यों के लिए किया गया काम ही मेरा आधार है। उन्होंने सदस्यों से अंतरात्मा की आवाज पर मत देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि आगे भी विकास करने की कोशिश करेंगे। उनका कहना है कि वादे तो टूट जाते हैं लेकिन कोशिशें कामयाब होती हैं। वर्ष 2022-24 के अपने दो वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने संघ भवन के बरामदा में ग्रिल से घेराबंदी करावाया। दोनों भवनों का वायरिंग करवाया और पंखा लगवाया। सभी सदस्यों को डायरी, कलम के साथ-साथ पैंट-शर्ट का कपड़ा अधिवक्ता फंड से दिया गया। ऑल इंडिया बार काउंसिल के मीटिंग में सदस्यों को बस से पटना ले गये जिसका सारा खर्च फंड से वहन किया गया। अधिवक्ता जगदीश ठाकुर को ब्रेन हेमरेज होने पर 10 हजार रुपये की राशि दी गई। उनकी मृत्यु होने पर 20 हजार रुपये की राशि दी गई। चुनाव आयोग को ₹5000 और चुनाव कार्य के लिए ₹5000 दिया गया। उन्होंने कहा कि अपने दो वर्षों के कार्यकाल में मैंने लगभग ढाई-पौने तीन लाख रुपया का बचत दिखाया है। उन्होंने बताया कि फिलवख्त बचत खाता में 4 लाख 74 हजार 281 रुपया है। अपने पूर्ववर्ती अध्यक्ष और सचिव के कार्यकाल में खाता में राशि जमा नहीं होने का आरोप अधिवक्ता जयकांत दूबे ने लगाया है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान खाता में राशि जमा नहीं की गई। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता मुकुल विकास श्रीवास्तव के अध्यक्ष और अधिवक्ता वृंदानंद सिंह के सचिव रहने के दौरान हाजिरी से ₹5 अधिवक्ता फंड के लिए राशि निकाली जाती थी जिसका हिसाब आज तक नहीं मिला। उसके बाद अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह के कार्यकाल में भी राशि का हिसाब नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता सुरेश सिंह के अध्यक्ष और अधिवक्ता अनिल चौबे के सचिव रहने के दौरान भी राशि का हिसाब नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि पहले जगदीशपुर अधिवक्ता संघ का निबंधन बिहार राज्य विधिक परिषद में अलग से नहीं था और यह आरा बार एसोसिएशन के अंतर्गत संचालित होता था। निबंधन के बाद भी संघ की राशि का हिसाब नहीं मिल सका और न ही खाते में राशि जमा हुई।
