
समाज को विश्वास में लेकर काम करे सरकार: डॉ एम रहमतुल्लाह
नई दिल्ली/तहसीन फात्मा,07 अगस्त।भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय के पूर्व सचिव और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर (आईआईसीसी) के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अफ़ज़ल अमानुल्लाह ने कहा कि भारत सरकार को किसी सामाजिक मुद्दे पर जल्दबाज़ी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। श्री अमानुल्लाह ने कहा कि भारत सरकार वक़्फ़ एक्ट संशोधन विधेयक लाने के पहले उस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजकर उसके सभी स्टेक होल्डर्स के साथ बैठक कर कोई निर्णय ले।
इसलिए कि ये मामला बहुत ही संवेदनशील है। जल्दबाज़ी में लिए गए फ़ैसले समाज की बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकती है। श्री अफ़ज़ल अमानुल्लाह ने कहा कि इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर को चाहिए की वो इस संवेदनशील मामले में लीड ले और सरकार को सही जानकारी उपलब्ध कराए। आईआईसीसी को चाहिए कि वो नीतीश कुमार, चन्द्राबाबू नायडू समेत सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों, वक़्फ़ के जानकारों, मुस्लिम संस्थाओं के रहनुमाओं को इस्लामिक सेंटर में बिठाकर एक बैठक करे भारत में वक़्फ़ की जायदाद से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर सरकार को पेश करे ताकि भारत सरकार सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर कोई निर्णय ले।
टीम अफ़ज़ल अमानुल्लाह के प्रवक्ता और बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी (बीओटी) के उम्मीदवार डॉ एम रहमतुल्लाह ने कहा कि वक्फ़ मामले में भारत सरकार मुस्लिम समाज को विश्वास में लेकर ही कोई क़दम उठाए। जल्दीबाज़ी में लिए गए निर्णय समाज और सरकार दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद् डॉ एम रहमतुल्लाह ने कहा कि पूर्व ब्यूरोक्रैट और आईआईसीसी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का ये सुझाव सराहनीय है कि इस्लामिक सेंटर इस संवेदनशील मामले में अपनी भूमिका निभाए। डॉ रहमतुल्लाह ने कहा कि आईआईसीसी वर्षों से निष्क्रिय है। समाज और देश के संवेदनशील मुद्दों पर भी अपनी भूमिका निभाने में विफल रहा है। इसलिए कि आईआईसीसी के पदाधिकारी या तो अक्षम हैं या फिर अपनी नीजि स्वार्थ के कारण सरकार की नाराज़गी मोल लेना नहीं चाहते। दोनों स्थिति चिंतनीय है। डॉ रहमतुल्लाह ने कहा कि इस बार के चुनाव में मतदाताओं को चाहिए कि वो योग्य, अनुभवी, निडर, और समाज के लिए काम करने की भावना रखने वाली टीम को ही वोट दें। ताकि देश और समाज का उत्थान हो सके।
टीम अफ़ज़ल अमानुल्लाह के बदरुद्दीन ख़ान, कमाल फ़ारूक़ी, अतहर ज़या, सिकंदर हयात ख़ान, सैफ़ुल इस्लाम, सोहैल रफ़त, डॉ मसरूर क़ुरैशी ने भी भारत सरकार से वक्फ़ मामले में सभी पक्षों की राय से ही निर्णय लेने की सलाह दी।
