
दरभंगा/बिहार (आशीष अंबर)20 जुलाई।
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर
गुरु साक्षात् परमब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।
गुरु पूर्णिमा हिंदू महीने के अषाढ़ की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चारों वेदों का ज्ञान देने वाले महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। मानव जाति के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उनके जन्मोत्सव को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। भारत , नेपाल और भूटान में हिंदुओ , जैनियों और बौद्धों द्वारा त्योहार के रूप ने मनाया जाने वाला गुरु पूर्णिमा सभी शैक्षणिक और आध्यात्मिक गुरुओं या शिक्षकों को समर्पित है। गुरु पूर्णिमा का पर्व बौद्धों द्वारा उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अपने पहले पांच शिष्यों को गौतम बुद्ध के पहले उपदेश की याद में मनाया जाता है। हालांकि हिंदू और हैं भी अपने शिक्षकों का सम्मान करने के लिए इस त्योहार को मानते हैं। ‘ गुरु ‘ शब्द में ‘ गु ‘ का अर्थ अंधकार और ‘ रु ‘ का अर्थ है अंधकार की दूर करने वाला । इसलिए इन दोनों शब्दों को मिलाकर गुरु शब्द का निर्माण हुआ है। इसलिए गुरु को अज्ञानता / अंधकार की दूर करने वाला माना गया है।
भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में भी गुरु की महिमा का विशेष महत्व है चाहे वह किसी भी क्षेत्र / विधा अथवा हमारे दैनिक जीवन में हो। जिनसे हम कुछ भी सीखते है वे हमारे गुरु है। वाल्मीकि , परशुराम , चाणक्य , वशिष्ठ , शुक्राचार्य , पाणिनी , संदीपनी , याज्ञवल्क्य इत्यादि प्रमुख गुरु रहे है। सभी गुरुओं को हमारा कोटि – कोटि नमन।

