भोपाल/मध्यप्रदेश 02 फरवरी।मध्यप्रदेश राजभाषा प्रचार समिति के तत्वावधान में अश्विनी कुमार दुबे के उपन्यास “हमारे हिस्से की छत” का लोकार्पण बीते रविवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मानस भवन के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा, मुख्य अतिथि अक्षरा के संपादक मनोज कुमार श्रीवास्तव एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सुरेंद्र गोविंद गोस्वामी सुरेंद्र बिहार उपस्थित रहे।
रघुनंदन शर्मा ने अध्यक्ष की पद से बोलते हुए यह कहा कि घर हर व्यक्ति की जरूरत है सिर्फ बंदर ऐसा प्राणी है जिस घर की जरूरत नहीं होती लेकिन हम मनुष्य हैं और हमें अपना घर बनाना चाहिए या हमें अपना घर हर हालत में मिलना चाहिए परिवार हमारा आदर्श माता-पिता देव तुम हो और बच्चे श्रवण कुमार इस प्रकार इस उपन्यास का दूसरा पक्ष बनता है जो आदर्श समाज के निर्माण की परिकल्पना को निरूपित करें
बौद्धिक चर्चा में भाग लेते हुए मनोज श्रीवास्तव ने उपन्यास की गंभीर मीमांसा की जिसमें उन्होंने बताया कि यह एक मध्वर्गीय परिवार की व्यथा कथा का वास्तविक चित्रण है। एक मध्यवर्गी परिवार के मुखिया के लिए एक मकान बनाना वास्तव में बहुत मुश्किल काम है और इस मुश्किल काम को पूरा करने में वह कितनी जद्दोजहद से गुजरता है इसका विस्तार से विवरण इस उपन्यास में है। सुरेश सुरेंद्र विहारी गोस्वामी ने विषय का एक अलग पक्ष निरूपित करते हुए बताया कि हमें हर परिवार में देवताओं की तरह मां-बाप को रखना चाहिए एवं श्रवण कुमार की तरह बच्चों को होना चाहिए। यदि हम इस परिकल्पना को लेकर आगे चलेंगे तो हम एक स्वस्थ और सुंदर समाज का निर्माण कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में दादा कैलाश चन्द्र पंत जी की विशेष उपस्थिति रही।
सर्वप्रथम कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का स्वागत सुरेश पटवा ने किया। अश्विनी कुमार दुबे ने अपने आधार वक्तम में अपनी रचना यात्रा एवं उपन्यास की कथावस्तु पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सरस संचालन चंद्रभान राही में किया।
कार्यक्रम की समाप्ति के पश्चात गोकुल सोनी ने सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा की घर प्रत्येक व्यक्ति का सपना होता है, परंतु इस उपन्यास की कथावस्तु बताती है की घर बनाने में कितनी पीड़ाएं खेलना पड़ती हैं। कार्यक्रम में शहर के अन्य साहित्यकार सुदर्शन सोनी, अशोक धमेनिया एवम कई अन्य साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दी।

