भोपाल/ मध्यप्रदेश 27 जनवरी।भोपाल भोजपाल साहित्य संस्थान , भोपाल की मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन हाट परिसर स्थित ’9 एम मसाला रेंस्तरां’ में संपन्न हुआ। कार्यक्रम संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष सुदर्शन सोनी की अध्यक्षता, साहित्यकार गोकुल सोनी के मुख्य आतिथ्य व वरिष्ठ साहित्यकार अश्वनी दुबे इंदौर के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। गणतंत्र पर केन्द्रित रचनाओं को प्रधानता दी गई।
प्रेमचंद्र गुप्ता द्वारा ’कुछ ऐसा गणतंत्र मनाएं’ , कैलाश मेश्राम द्वारा ’प्रेम के छंद को गुनगुनाते रहें’ चरनजीत सिंह कुकरेजा द्वारा रचना “मेरा वतन”, ’ सुरेश पटवा द्वारा “राजनीति ने काम एक नेक कर दिया, कटक से अटक तक भारत एक कर दिया” डॉक्टर विमल शर्मा द्वारा ’साफ कर दिए तूने मेरे जख्म रूई से, पर इन्हे सिल दिया जहर बुझी सुई से ’ गोपेश बाजपेयी द्वारा “शूरवीर की देह आज घर वापिस आई है, इसीलिये घर आंगन की तुलसी मुरझाई है”। मनीष बादल द्वारा गीत ’मुसलमान हिन्दु सिक्ख व ईसाई एक। लोकतंत्र बतलाईए कंहा मिले यूॅ नेक’, मीनू पांडेय द्वारा “अमर रहे गणतंत्र हमारा” रमेश नंद द्वारा पहले मैं बहुत कार्य करता था फिर मेरी नौकरी लग गई संजय कुमार द्वारा व्यंग्य ’ज्ञानार्जन केन्द्र में एक दिन” हास्य-व्यंग्य’ , अशोक व्यास द्वारा ’सत्तर प्लस का युवा गणतंत्र’ चन्द्रभान राही द्वारा ’स्थापित साहित्यकार , विशिष्ट अतिथि अश्विनी दुबे द्वारा व्यंग्य ’बायोडाटा महिमा’ पढ़ा गया।
मुख्य अतिथि गोकुल सोनी ने पढ़ा~ “सच पूछो तो एक तेग है, तलवार है चमचा।
दुनिया तो बड़ी मूर्ख है, होशियार है चमचा।”
संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष सुदर्शन सोनी द्वारा सशक्त व सामयिक व्यंग्य ’एक वोटर के हसीन सपने’ का पाठन किया गया जिसे समकालीन हकीकत मान कर खूब सराहा गया। मंजू पटवा एवम श्रीमती शर्मा के साथ ही अन्य साहित्यकारों द्वारा भी अपनी रचना का पाठ किया गया ।
संचालन चन्द्रभान राही व अध्यक्षीय उदबोधन संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष सुदर्शन कुमार सोनी द्वारा दिया गया। सुरेश पटवा द्वारा आभार प्रकट किया गया।
