आरा/भोजपुर 24 दिसंबर।नागरी प्रचारिणी पुस्तकालय के सभागार में वर्षांत रचना पाठ का आयोजन जन संस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ के तत्त्वावधान में आयोजित हुआ जिसमें शहर के रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के शुरु में वर्ष भर की प्रमुख रचनाओं और सम्मानित रचनाकारों को बधाई प्रेषित की गई। अध्यक्षता अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, रविन्द्र नाथ राय और जितेंद्र कुमार ने की। मंच संचालन ओम प्रकाश मिश्र ने किया। रचना पाठ की शुरुआत डॉ सिद्धनाथ सागर की कहानी मोह के साथ हुयी।
हिंदी रचनाओं में जितेंद्र कुमार ने दो छोटी कवितायें,अयोध्या प्रसाद उपाध्याय ने मेरे बाबूजी, रविन्द्र नाथ राय ने दो कवितायेँ, सुधीर सुमन ने अपनी कवितायें हमें जो तय करना है और माँ, अरुण शीतांश ने बैलगाड़ी और एक अनागरिक होने का दुख, निलाम्बुज सरोज ने हे कबीर और विकल्प, ओम प्रकाश मिश्र ने एक घरेलू प्रेम कविता और अलविदा साल, रवि शंकर सिंह ने तानाशाह की लाठी, सिद्धार्थ वल्लभ ने उलटी वाकी धार और ओरहन सुनाई। इसके अलावे वरिष्ठ कवि जनार्दन मिश्र, संतोष श्रेयांश ने भी स्वरचित कविताओं का पाठ किया। भोजपुरी रचनाकारों में विक्रांत ने कईसन समय आईल बा, सुमन कुमार सिंह ने का बुझिहें उ , केहू न जाने तथा झुनझुना देश, रवि प्रकाश सूरज ने बदलल बयार और बदलल रंग कवितायेँ सुनाई। कार्यक्रम के अंत में विगत वर्ष के दिवंगत रचनाकारों, नचिकेता, शमीम युसूफी, मीना राय, ब्रज किशोर दुबे, आनंद सन्धिदूत आदि की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। रचनापाठ में शहर के कई सुधी श्रोता भी उपस्थित थे।
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