भोजपुरी पत्रिका लकीर और नाटक तरेगन के मेला का हुआ लोकार्पण
आरा/भोजपुर 19 दिसंबर।भिखारी ठाकुर जयंती समारोह विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग के सभागार में भिखारी ठाकुर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ प्रारम्भ हुआ। इस मौके पर भिखारी ठाकुर का साहित्य और आजु के समाज विषय पर व्याख्यान तथा भोजपुरी पत्रिका लकीर के १० वें अंक एवं डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना रचित नाट्य संग्रह तरेगन के मेला का लोकार्पण हुआ। व्याख्यान के मुख्य वक्ता चम्पारण से आये प्रख्यात साहित्यकार तथा शिक्षक डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना को अंगवस्त्र एवं भिखारी ठाकुर की पेंटिंग देकर स्वागत किया गया। डॉ मस्ताना ने भिखारी ठाकुर की रचनाओं की चर्चा करते हुए उनमें व्याप्त सामाजिक चेतना के भाव को रेखांकित किया। उन्होंने भिखारी साहित्य को सामाजिक चिंतन, सामाजिक यथार्थ, लोकचेतना का कारूणिक साहित्य बताया। डॉ मस्ताना ने भिखारी ठाकुर के साहित्य को गीति नाट्य परम्परा का ऐसा साहित्य बताया जिसमें लोकमंगल तथा सामाजिक यथार्थ का वास्तविक चित्रण है और इनकी रचनाएं विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर हैँ। अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने स्वरचित गीत हम हई भोजपुरिया गाकर भावविभोर कर दिया।
व्याख्यान से पहले विभागाध्यक्ष दिवाकर पाण्डेय ने भिखारी ठाकुर के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डाला तथा उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की चर्चा की। इस अवसर पर जमशेदपुर से प्रकाशित भोजपुरी पत्रिका लकीर के १० वें अंक तथा डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना रचित नाट्य संग्रह तरेगन के मेला का भी लोकार्पण हुआ। जयंती समारोह के दौरान भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान द्वारा डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना, साहित्यकार रामयश अविकल, जिला अभिलेख पदाधिकारी सरपंच राम, भोजपुरी छात्र संघ संयोजक स्यंदन सुमन, शोधार्थी और मैथिली भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार सदस्य रवि प्रकाश सूरज को भोजपुरी सेवक सम्मान २०२३ प्रदान किया गया।
जयंती समारोह में हिंदी साहित्य सम्मेलन और सीनेटर बलिराज ठाकुर, पूर्व विभागाध्यक्ष रविन्द्र नाथ राय, अयोध्या प्रसाद उपाध्याय, आलोचक जितेंद्र कुमार, साहित्यसेवी शिवदास सिंह ने भिखारी ठाकुर के जीवन, रचनाकर्म और रंगकर्म पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन स्यंदन सुमन तथा धन्यवाद ज्ञापन रवि प्रकाश सूरज ने किया। जयंती समारोह में अर्थशास्त्र विभाग के नीरज वर्मा, हिंदी विभाग के निलाम्बुज सरोज, संस्कृत विभाग के संजय चौबे , भोजपुरिया जन मोर्चा के कुमार शीलभद्र, बिनोद सिंह, गुजरात विद्यापीठ के प्रो अशोक सिंह, साहित्यकार कृष्ण कुमार, लाखन सिंह, भोजपुरी आंदोलन से जुड़े पत्रकार नरेन्द्र सिंह, जितेंद्र शुक्ल के अलावा कई विभागों के विद्यार्थी संजय कुमार, सोहित सिन्हा, राजेश कुमार, रवि रंजन, धनंजय, विकास, अभिषेक, प्रियंका सिंह आदि की उपस्थिति रही।

भोजपुरी पत्रिका लकीर और नाटक तरेगन के मेला का हुआ लोकार्पण