भोपाल/मध्यप्रदेश 14 दिसंबर । डाक्टर अशोक तिवारी अमन की कृति ‘इतनी सी बात’ – लघुकथा संग्रह का लोकार्पण तुलसी साहित्य अकादमी मुख्यालय भोपाल मे किया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् पूर्व संयुक्त संचालक म.प्र.शासन शिक्षा विभाग ने की। मुख्य अतिथि नर्मदापुरम से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार पंडित गिरिमोहन गुरु ‘नगरश्री’ रहे, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार यायावर कवि सुरेश पटवा रहे । सुपरिचित व्यंग्यकार एवं गोकुल सोनी ने ‘इतनी-सी बात’ लघुकथा संग्रह की समीक्षा की।
माता सरस्वती की पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। मंचस्थ अतिथियों ने डा.अशोक तिवारी अमन के लघुकथा संग्रह इतनी सी बात का लोकार्पण किया। इसके बाद डा.अशोक तिवारी अमन लोकार्पित कृति की दो लघुकथाओं का पाठ किया।
गोकुल सोनी लोकार्पित कृति की समीक्षा की। सोनी ने लघुकथा विधान के मानकों पर प्रकाश डाला।
गोकुल सोनी ने कहा कि लघुकथा आज की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है। अच्छी लघुकथाएं लिखने के लिए आवश्यक है कि लघुकथा हेतु निर्धारित मानदंडों का पालन हो और उनमें सकारात्मक और लोक मंगल का भाव निहित हो। उन्होंने इतनी-सी बात की लघुकथाओं को लघुकथा विधान के अनुरूप प्रतिपादित किया।
विशेष अतिथ सुरेश पटवा ने कहा कि लघुकथा लिखने के पूर्व लघुकथा लेखन का मार्गदर्शन करने वालीं अशोक भाटिया की पुस्तकें अवश्य पढ़ें, तभी आप सफल लघुकथा लेखक बन सकते हैं।
होशंगाबाद से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार पंडित गिरिमोहन गुरु ने कहा कि तुलसी साहित्य अकादमी के कार्यक्रम सदैव उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण होते हैं। मुझे इस कार्यक्रम में बोलने एवं रचना पाठ का अवसर मिला मेरा सौभाग्य है।
कार्यक्रम अध्यक्ष डा.राजेश तिवारी जी ने अपने उद्बोधन में लघुकथा विधा की उपयोगिता एवं सार्थकता पर विचार व्यक्त किये। लघुकथा वर्तमान की भागमभाग भरी जिन्दगी में पाठक की रुचि को तृप्त करने में सफल हो रही है।
प्रथम सत्र का संचालन एवं स्वागत उद्बोधन तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.मोहन तिवारी आनंद ने किया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सर्दी -जाड़ा विषय पर केन्द्रित काव्यगोष्ठी हुई जिसमें 42 कवियों ने पूर्व निर्धारित विषय पर अपनी चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया।
विद्या श्रीवास्तव ने अपने रचना पाठ में-
ॠतु सर्दी की आई,
सबके मन को भाई।
जो रहते फुटपाथों पर
उनकी शामत आई।
पढ़ी।
डा.शिवकुमार दीवान ने जाड़े पर केन्द्रित दोहों का पाठ किया –
मौसम ने अंगड़ाई ली,
ठंड पकाये अंग।
सूरज सरमाने लगा,
मचलन लगे अनंग।।
चंद्रभान सिंह चंद्र ने-
जाड़े में मिले जा जन्म को सुफल।
पुनिया की दुनिया में एक नई हलचल।
रचना पढ़ी।
सरोज लता सोनी ने-
शरद ॠतु की शर्द हवाएं,
अंतर्मन तक खूब सताएं।
रचना पढ़ी।
डा.संगीता भारद्वाज मैत्री ने-
शीत ॠत जब आई,
सब छिप जाते ओढ़ रजाई।।
रचना का पाठ किया।
प्रेम चंद्र गुप्ता ने –
सूरज को जब से मिला,
शीत सखी का साथ।
धूप गुनगुनी हो गई,
सहलाती है गाय।।
का पाठ किया।
अशोक व्यग्र ने अपनी रचना में कुछ इस तरह कहा-
शीत गुलाबी हुई शिशिर में,
पत्र वस्त्र गिरते तरु के।
शिवांश सरल पढ़ा-
ये सर्दी के मौसम सुहाने लगें
अब तो गद्दा रजाई सुहाने लगें।।
दीपक पंडित ने एक ग़ज़ल प्रस्तुत की-
किसी झील का एक खिलता कमल है।
न हिन्दी न उर्दू ग़ज़ल तो ग़ज़ल है।
नर्मदापुरम से पधारे कवि पंडित गिरिमोहन गुरु ने माॅं पर केन्द्रित दोहों का पाठ किया –
माॅं मीठी हरमोनियम,
पितु तबले की थाप।
भाई बहन हैं सात स्वर,
पुर परिजन आलाप।।
डा.मीनू पाण्डेय ने अपनी रचना –
देखो ये जाड़े की ॠतु आई
इतराती बलखाती।
सारे जहां की रंगत लगे हैं
ठिठुरती, कंपकंपाती।।
धर्मदेव सिंह ने-
अनल अनिल जल माटी सारे,
जीवन के हैं धाम रे।
सबको है इसमें ही मिलना,
होते क्यों बदनाम रे।।
दुर्गा रानी श्रीवास्तव जी ने अपनी रचना में पढ़ा-
शीत ॠत आ गई,
ठंडी हवा आ गई।
गोकुल सोनी ने ठंड की कविता में पढ़ा –
पानी भओ बर्फ के जैसो,
मैं से भाप निकल रई ।
हवा लगे जैसें डालने पे,
ठंडे चांटा जड़ रई ।
तुलसी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.मोहन तिवारी आनंद ने ठंड के कुछ दोहों का पाठ किया –
कम्बल, गद्दा, रजाई,
सबको देने मात।
कमर कसे ठंडक खड़ी,
द्वारे सारी रात।।
जयमाला लेकर खड़ी
ठंड वृद्ध के द्वार।
मूड़ हिलाते वृद्ध ने,
साफ किया इंकार।।
द्वितीय सत्र का संचालन तुलसी साहित्य अकादमी के संगठन मंत्री चंद्रभान सिंह पंवार चंद्र ने किया।
आभार प्रदर्शन अकादमी के महासचिव डा.शिवकुमार दीवान ने किया।
अंत में धन्यवाद सहित कार्यक्रम संपन्न होने की घोषणा की गई।


