
RKTV NEWS/ अनिल सिंह 19 नवंबर। भिखारी ठाकुर परंपरा व उनके नाटकों और गीतों को जगह जगह प्रस्तुत करने वाले लोक कलाकार 116 वर्षीय रामाज्ञा राम के दिवंगत होने पर भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया है।
शोध संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार नरेंद्र सिंह एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार से मांग की है की मरणोपरांत छपरा के रामचंद्र मांझी की तरह रामज्ञा राम को भी “पदमश्री” दें।
ज्ञात्व हो की लगभग 116 वर्ष पूर्व कोइलवर प्रखंड (भोजपुर,बिहार) अंतर्गत विष्णुपुरा डुमरिया गांव निवासी व निर्धन पासवान परिवार में जन्मे रामाज्ञा राम बचपन से ही लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की मंडली के साथ रहते थे।भिखारी ठाकुर के दिवंगत होने के बाद उनकी लोक कला की परंपरा को आजीवन आगे बढ़ाया। रामज्ञा राम ने उस समय दलित ,महादलित परिवार के बच्चों को इस कला में प्रांगत किया।बाद में दुखन पासवान ,विजय कुमार आदि कई ने इस परंपरा में खूब नाम कमाया तथा आमलोगो के बीच चर्चित रहें।

आरा के पटेल बस पड़ाव परिसर स्तिथ भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच से रामाज्ञा राम लगभग दो दशक पूर्व से जुड़े थे और भिखारी ठाकुर के कई नाटकों और गायिकी की प्रस्तुति इस मंच से की ।मंच पर कार्यक्रम के दौरान आए स्व बी एन तिवारी उर्फ भाई भोजपुरिया व लोक गायिका कल्पना पटवारी ने रामाज्ञा राम और उनकी मंडली से इतने प्रभावित हुए की भाई भोजपुरिया ने इनका कार्यक्रम रांची के बड़े बड़े मंचो पर करवाया वही कल्पना पटवारी ने इनसे सीखकर “द लगेसी ऑफ भिखारी ठाकुर” की सीडी निकलवाया।बाद में कल्पना पटवारी मुंबई बुलाकर इन्हें अपने साथ रखने लगी।
घुमक्कड़ प्रवृति और नशा से कोशो दूर रहने वाले रामाज्ञा राम कभी लालू प्रसाद यादव के दरबार के रत्नों में शामिल थे। कहने में संकोच नहीं होगा की गवई लोक कलाकारों को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दरबार में जो मान सम्मान मिला वो अन्यत्र नहीं। गंगा स्नान नाटकों के दौरान जब रामाज्ञा राम मलेछू का किरदार निभाते हुए कहते थे की मेरी मां की मृत्यु हो जाने पर मृत्युभोज के दौरान बाबा जी लोग को नही पंडित जी को भोज कराएंगे यानी जो ज्ञाता हो उसको ढोंगी को नही।इसी तरह पिया निसईले नाटक ली प्रस्तुति के दौरान अपना किरदार निभाते हुए सामाजिक संदेश देते थे की नशा सेवन से कैसे परिवार बर्बाद होता है।
अगड़ी और पिछड़ी सभी जाति और धर्म के लोगो ने उन्हें सम्मान दिया पर सरकार द्वारा भी उन्हें सम्मान मिलना चाहिए था वो उन्हे आजीवन प्राप्त नहीं हो सका ।
साहित्यकार डॉ के डी सिंह,कवि केशव ठाकुर, ब्यास कमलेश पासवान वरिष्ठ रंगकर्मी कृष्णेंदु,कर्मचारी नेता उमेश कुमार सुमन, प्रो डॉ रामतवक्या सिंह , डॉ किरण कुमारी, डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा,पत्रकार कमलेश पांडे,साहित्यकार अतुल प्रकाश आदि ने भी रामाज्ञा राम को पदमश्री देने की मांग की है।




