
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)18 नवंबर।हिंदुओं का सबसे महान और पवित्र छठ पर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान पूरी पवित्रता के साथ छठव्रतियों के घरों में प्रारंभ हो चुका है। कल संध्या समय अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य छठ व्रतियों द्वारा दिया जाएगा। मन की मुरादे पूर्ण होने के लिए मन्नत मांगी जाएगी।
जिसके लिए छठ व्रती कठिनतम व्रत धारण करते हैं। उन्हें विश्वास है कि सभी छठ व्रतियों की मनोकामनाएं छठी माई पूर्ण करेंगी।कई दिनों से भक्तिमय गीतों में पूजा की अनुगुंज सड़क, मोहल्लों और घरो पर सुनाई दे रही है।रोड से लेकर घाटों तक सफाई की लगातार कोशिश जारी है। लाइट का घर से लेकर घाटों की सजावट खुबसूरत लग रहा है।
कल नहाए खाए का आयोजन पवित्र स्नान से लौका भात का प्रसाद ग्रहण भक्ति भावना से ग्रहण किया।
आज खरना का कार्यक्रम सभी छठव्रतियों द्वारा हो रहा है। इसमें शुद्ध रोटी और खीर का प्रसाद बनता है और आसपास के लोगों को बुलाकर प्रसाद ग्रहण कराने की परंपरा है।

डा विभा कुमारी सचिव रेडक्रॉस सोसायटी ने बताया की भगवान सूर्य पृथ्वी के साक्षात देवता हैं। सनातन धर्म में ही ऐसी परंपरा है जो उगते सूर्य और डूबते सूर्य को भी उसी भक्ति भावना से पूजा करते हैं और प्रकृति से जीवन जीने की सीख प्राप्त करते हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा भक्ति भाव में आगे रहती है और छठी मां का व्रत कर अपने जीवन को धन्य धान्य बनाती है।

मोहम्मद सरफराज खान सामाजिक कार्यकर्ता का मानना है कि छठ पर्व सदियों सदियों से सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देते आ रहा है।समाज के सभी लोग भगवान सूर्य देव का ,छठी मैया का पूजा करते हैं, और अगर नहीं भी करते हैं तब भी पूरे तन मन धन से सहयोग करते हैं यही हिंदुस्तान की खूबसूरती है और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

तारकेश्वर ठाकुर अधिवक्ता पटना हाई कोर्ट ने बताया कि हमारी सभ्यता संस्कृति और संस्कार पूर्वजों से हमें स्वत मिलते रहे हैं और उसी का नतीजा है कि हम भगवान को मानने वाले आस्तिक लोग हैं।धर्म में विश्वास करते हैं। मै जब नवी कक्षा में था तब से घाट की सफाई, कलक्ट्री सूर्य मंदिर निर्माण में सहयोग और उसी भाव से आज तक सेवा में लगे रहते हैं। भगवान भास्कर की आराधना से हमें ऊर्जा मिलती है और परोपकार की भावना बनी रहती है।

दिनेश मुन्ना पूर्व वार्ड पार्षद का मानना है कि भगवान सूर्य देव की कृपा पृथ्वी के समस्त प्राणियों पर एक समान पड़ती है। अर्थात समरूप देखना और ऊर्जा प्रदान करना हैं।युवा समूह में नगर की सफाई,सजावट,पूजन सामग्री का वितरण तथा छठ व्रतियों की सेवा में जुट जाते हैं।चार दिनों का पवित्र पर्व भक्ति की शक्ति से माताएं बहने पूरा कर लेती है ।यह छठ मां की ही कृपा है।

डॉ बीपी सिंह एम ओ और,श्रीराम सिंह मेमोरियल हॉस्पिटल बाबू बाजार आरा ने कहा कि इस महान पर्व की चर्चा पुराणों, महाभारत और रामायण में भी है। लंका विजय के बाद भगवान श्री राम ने मां सीता के साथ उपवास रहकर सूर्य की आराधना की थी।
वही द्रोपदी के सब कुछ होने के बाद छठ पूजा करने का वर्णन मिलता है। इस पूजा से साफ संदेश मिलता है की प्रकृति का वरण हर हालत में सबको करना है। प्रकृति संतुलित रहेगी तब समस्त जीवधारियों का अमन चयन बरकरार रहेगा।





