पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 15 नवम्बर। ब्रह्मा जी के चित से उत्पन्न एवं ब्रह्मांड का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त के वंशज कायस्थ समुदाय के लोगों ने कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भगवान चित्रगुप्त की पूजा, अर्चना एवं वंदना पारंपरिक रूप से हर्षोल्लास के माहौल में की। इस अवसर पर कायस्थ जनों ने भगवान चित्रगुप्त के फोटो और मूर्ति के समक्ष पूजा,अर्चना एवं वंदना की। लोगों ने फूल, माला, अक्षत, रोली, फल एवं मिठाई चढ़ा कर पूजा की। साथ ही लोगों ने कलम, दवात एवं पुस्तक की भी पूजा की। पूजा के बाद लोगों ने अदरक और गुड़ के बने चरणामृत का पान किया। आटे के बने कलम- दवात को पका कर पूजा के बाद दही और गुड़ के साथ उसे खाने की भी परंपरा है। पूजा के बाद लोग अपने कलम को मौली से बांधकर रख देते हैं। पूजा के बाद पूरे दिन लोग कलम का उपयोग नहीं करते हैं। अब तो लड़कियाॅ और महिलायें भी चित्रगुप्त भगवान की पूजा, अर्चना एवं वंदना करती हैं।



