15वीं पुण्यतिथि पर पाँच मनीषियों को दिया गया ‘शिखर-सम्मान’, आयोजित हुई कवि-गोष्ठी।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )20 जुलाई। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत, मैथिली, हिन्दी और ऊर्दू के मनीषी साहित्यकार आचार्य फ़ज़लुर्रहमान हाशमी न केवल सांप्रदायिक-सौहार्द के अप्रतिम उदाहरण थे, अपितु भारतीय-दर्शन के भी निपुण व्याख्याता थे। उन्हें पाली और संस्कृत का भी विशद ज्ञान था। भारतीय-दर्शन और वैदिक-साहित्य का उन्होंने गहरा अध्ययन किया था। साहित्यिक मंचों के भी वे कुशल और लोकप्रिय संचालक थे। साहित्य अकादमी के सदस्य रहे आचार्य हाशमी द्वारा तीनों भाषाओं में विरचित 17ग्रंथ उनके महान साहित्यिक अवदान के परिचायक हैं। वे एक ऐसे साहित्यकार थे, जिन्हें मैथिली, हिन्दी और ऊर्दू के पाठक और साहित्यकार समान रूप से सम्मान देते थे। वे सच्चे अर्थों में एक राष्ट्रवादी मुसलमान थे
यह बातें सोमवार को, ‘इंस्टिच्युट ऑफ स्कौलर ट्रस्ट’ के सौजन्य से, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, आचार्य हाशमी की 15वीं पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति-सह-सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि आचार्य हाशमी जैसे सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक-पुरुष आज सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। सौहार्द के ऐसे ही प्रतीकों से संसार में शांति स्थापित हो सकती है।
समारोह के मुख्य अतिथि और सुप्रसिद्ध नेत्र-रोग विशेषज्ञ और बिहार विधान परिषद के सदस्य डा राजवर्धन आज़ाद ने कहा कि आचार्य हाशमी बहु-भाषाविद विद्वान थे। उन्हें जितना इस्लाम-धर्म का ज्ञान था, उतना ही हिंदू धर्म का। इसलिए कि उन्होंने संस्कृत-साहित्य के माध्यम से वैदिक-धर्म का गहरा अध्ययन किया था।
बिहार लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद करीमी ने प्रो हाशमी की साहित्य-सेवाओं को स्मरण करते हुए कहा कि हाशमी साहब की रचनाएँ विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी पढ़ाई जाती है। हाशमी साहब ने विद्यार्थियों को यह प्रेरणा दी कि वे अपनी प्रतिभा को बढ़ाएँ। योग्यता और क़ाबिलियत ही इंसान को ऊँचा स्थान दिलाता है। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत किया।
इस अवसर पर, बी डी कौलेज के प्राचार्य प्रो दिवाकर प्रसाद, जगत नारायण लाल महाविद्यालय, खगौल की प्राचार्या प्रो मधुप्रभा सिंह, किसान कौलेज, सोहसराय के प्राचार्य प्रो दिव्यांशु कुमार, सोगरा कालेज, बिहारशरीफ के प्राचार्य डा एस जी मोहिद्दीन तथा दून पब्लिक स्कूल, बेगूसराय के प्राचार्य जी के सिंह को ‘आचार्य हाशमी शिखर-सम्मान’ से विभूषित किया गया। मंचस्थ अतिथियों ने सभी अभिनन्दित मनीषियों को, वंदन-वस्त्र, स्मृति-चिन्ह, प्रशस्ति-पत्र तथा दो हज़ार एक सौ रूपए की सम्मान-राशि देकर सम्मानित किया।
सम्मान-समारोह के उपरांत एक कवि-सम्मेलन का भी आयोजन हुआ, जिसमें वरिष्ठ कवि डा रत्नेश्वर सिंह, वरिष्ठ शायर प्रो एहसान शाम, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, डा केसर जाहिदी, सिद्धेश्वर, शमा कौसर ‘शमा’, डा प्रशांत कुमार, मोईन गिरीडीहवी, पं गणेश झा, सदानन्द प्रसाद, डा अवधेश द्विवेदी, अर्चना भारती, डा सुषमा कुमारी, विभारानी श्रीवास्तव, चित्तरंजन भारती, नन्दन कुमार आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी काव्य-रचनाओं से समारोह को मधुमय बनाया।
अतिथियों का स्वागत ट्रस्ट के सचिव और पत्रिका ‘दूसरा मत’ के संपादक ए आर आज़ाद ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन सैय्यद असद आज़ाद ने किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया।
सम्मेलन के प्रबंधमंत्री कृष्ण रंजन सिंह, वरिष्ठ व्यंग्यकार ईं बाँके बिहारी साव, इन्दुभूषण सहाय, डा अशोक प्रियदर्शी, रंजन कुमार अमृतनिधि, वीरेंद्र यादव, गणेश कुमार सिंह, सच्चिदानन्द प्रसाद आदि प्रबुद्धजन समारोह में उपस्थित थे।

