
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड) 23मई।उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी शशि प्रकाश सिंह के निर्देशानुसार जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से आज उप विकास आयुक्त पीयूष सिन्हा की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। समाहरणालय स्थित सभागार में आयोजित इस बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, सहित विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे। बैठक में ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के अंतर्गत संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की भौतिक और वित्तीय उपलब्धि की समीक्षा की गई। उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सरकारी राशि का शत-प्रतिशत उपयोग छात्रों के विकास के लिए होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कागजी दावों के बजाय धरातल पर जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जांच करें।
इसके अलावा बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने माध्यमिक (10वीं) और उच्च माध्यमिक (12वीं) के परीक्षा परिणामों पर असंतोष व्यक्त करते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता में तत्काल सुधार के निर्देश दिए। साथ ही स्कूलों में खाली पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा की गई। साथ ही स्कूलों के भवनों, शौचालयों, और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का आदेश दिया गया। जिले में स्कूल छोड़ने वाले (ड्रॉप-आउट) बच्चों को चिह्नित कर वापस स्कूल लाने और नए सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया। वही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय और मॉडल स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा, शैक्षणिक स्तर और भोजन-आवास की सुविधाओं की विशेष समीक्षा की गई। आगे जिले में स्कूल छोड़ने वाले (ड्रॉप-आउट) बच्चों को चिह्नित कर वापस स्कूल लाने और नए सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया। साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय और मॉडल स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा, शैक्षणिक स्तर और भोजन-आवास की सुविधाओं की विशेष समीक्षा की गई। बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त श्री पीयूष सिन्हा ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देशित किया कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के विद्यालयों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज इंस्पेक्शन) करेंगे। साथ ही छात्र हित से जुड़ी योजनाओं (जैसे- पोशाक, किताब, छात्रवृत्ति) के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। आगे उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव सिर्फ फाइलों में नहीं बल्कि बच्चों के प्रदर्शन में दिखना चाहिए। इसके लिए नियमित रूप से टेस्ट और कस्टमाइज्ड लर्निंग पर ध्यान दें।
