दाम्पत्य जीवन की वर्षगांठ पर किया वृक्षारोपण,दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
RKTV NEWS/बक्सर (बिहार)16 मई।आज अपने जन्मभूमि ग्राम हरोजा में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के सीनेट सदस्य डॉ. विनोद कुमार सिंह ने अपने शादी की 33वें सालगिरह के अवसर पर विनोद वाटिका में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर डॉ. का विनोद ने कहा कि हम पर्यावरण पर पूरी तरह निर्भर है यदि पर्यावरण नहीं हो तो हमारा कोई अस्तित्व नहीं है।
पर्यावरण मात्र हमारे आस-पास का घेरा नहीं, बल्कि जीवन का वह मधुर संगीत है जो सुबह के पक्षियों की चहचहाहट और बहती हुई नदियों के कल-कल स्वर में सुनाई देता है। जब हम ऊंचे पर्वतों की चोटियों को देखते हैं या घने जंगलों की हरियाली में खो जाते हैं, तब हमें आभास होता है कि प्रकृति ईश्वर का सबसे सुंदर उपहार है। प्रकृति ऐसी माँ है जो हमें सांस लेने के लिए शुद्ध वायु, प्यास बुझाने के लिए शीतल जल और क्षुधा शांत करने के लिए अन्न प्रदान करती है। पर्यावरण की सुंदरता ही हमारे अस्तित्व का आधार है।पर्यावरण की यह सुंदरता ही है जो जीवन में नवीनता और ऊर्जा का संचार करती है।
जीवन का स्पंदन: हमारा पर्यावरण
हमारा अस्तित्व पर्यावरण से अलग नहीं है; हम इसके एक अभिन्न अंग हैं। धरती की हरियाली केवल आँखों को सुकून देने के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे फेफड़ों की धड़कन है। वृक्षों की घनी छाया और मिट्टी की सोंधी खुशबू हमें याद दिलाती है कि हम इसी मिट्टी की संतान हैं। आज के भागदौड़ भरे जीवन में, जब हम आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल हैं, तब यह शांत और शीतल पर्यावरण ही है जो हमें थकावट से मुक्त कर एक नई चेतना प्रदान करता है।
पर्यावरण की सुंदरता जितनी लुभावनी है, उसकी रक्षा करना उतना ही अनिवार्य है। यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ भी ओस की बूंदों की चमक और स्वच्छ नीले आसमान का आनंद ले सकें, तो हमें आज ही जागरूक होना होगा। पर्यावरण के प्रति हमारा प्यार केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे कार्यों—जैसे वृक्षारोपण और प्रदूषण पर नियंत्रण—में दिखना चाहिए। क्योंकि जब प्रकृति मुस्कुराएगी, तभी मानवता सुरक्षित रहेगी।
प्रकृति में हर जीव और तत्व का अपना महत्व है।हमें संसाधनों का उपयोग इस तरह करना चाहिए कि प्रकृति को क्षति न पहुंचे। एक छोटा सा पौधा लगाना भी पर्यावरण के प्रति एक बड़ा योगदान है। इस संदर्भ में महात्मा गांधी ने कहा था कि
“प्रकृति के पास हर व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच के लिए नहीं।”
इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार सिंह की जीवनसंगनी गीता कुमारी, कुमारी राजलक्ष्मी, सुपुत्र दिवेन्दू प्रकाश,नातिन प्रिशा राज व अन्य परिवारिक सदस्यों में मनोज कुमारी, रितू कुमारी,निधि कुमारी, राजदीप, रितेश, प्रिंस,संजय कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।

