
शाहपुर/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)07 मई।पवित्र नदी धर्मावती के तट पर चक्की प्रखंड अन्तर्गत भरियार गांव में प्रसिद्ध संत जीयर स्वामी जी महाराज के कृपापात्र विश्वाचार्य ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ में दशम स्कंध की कथा कहते हुए कहा कि भगवान के सभी अवतार लोक-मंगल कारी हैं।पर श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतार की बात ही कुछ निराली है। सूर्य वंश में श्रीराम त्रेता में श्रीअवध के राजमहल में प्रकट होते हैं, जबकि श्रीकृष्ण द्वापर में मथुरा के जेल में प्रकट होते हैं। श्रीराम शुक्लपक्ष के नवमी तिथि को मध्य दिवस में प्रकट होते हैं जबकि श्रीकृष्ण कृष्णपक्ष के अष्टिमी तिथि को मध्य रात में प्रकट होते हैं।पर दोनों ही श्याम हैं, सुन्दर है, अतः दोनों ही श्याम सुंदर के नाम से जाने जाते। दोनों का ही पावन चरित्र भक्तहितकारी है। दोनों ही धर हैं पर अंतर इतना ही है श्री राम धनुर्धर है जबकि श्रीकृष्ण मुरलीधर हैं। दोनों को ही चरवाही पसन्द है,पर अंतर इतना ही है कि श्रीराम वंदर भालू की चरवाही करते जबकि श्रीकृष्ण गाय बच्छड़ो की चरवाही करते। दोनों ही पके बिहारी हैं,पर अंतर बस इतना है कि श्रीराम अवध बिहारी हैं जबकि श्रीकृष्ण वृन्दावन बिहारी हैं। दोनों ही भक्तवत्सल हैं ,पर श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम और श्रीकृष्ण व्यवहार पुरुषोत्तम हैं। आचार्य जी ने कहा कि भगवान सबको सुधरने का मौका देते हैं,पर सज्जन सुधर जाते हैं, मगर दुर्जन नहीं।इस कथन की पूष्टि में आचार्य धर्मेन्द्र ने कहा की राजन परीक्षित को श्रृंगीऋषि ने शाप दिया सातवे दिन तकक्षक के डसने से जीवन लीला समाप्त होजाएगी।वे संभल गये , राजपाट छोड़ साधन में लग गये ।जबकि कंस के लिए भी आकाशवाणी हुई देवकी के आठवें गर्भ से तुम्हारी जीवन लीला समाप्त होगी।पर कंस नहीं संभल सका,वरन देवकी वसुदेव को जेल में डाल दिया और उनके संतानों का बध करता रहा।
