
जिला योग छँटाई
चिट्ठी में गति ला दो छाँटक, जल्दी से पहुँचा दो; नैहर से जब निकल पड़ी हूँ, पिया पास पहुँचा दो।
सौ सखियाँ मिल साथ चली हूँ, पिया नगर है अलग-अलग; चालिस का घर ठाँव पिया के, चालिस का पार जिला के, पर अगल-बगल । बीस पार करेंगी सिमा राज्य के, कुछ कलकत्ता, दिल्ली कुछ बाम्बेवाली; महानगर में पिया है जिसके, होती है चंचल नखरे वाली।
देख-सुन बैठाते रहना अलग-अलग, चार तरह की डोली में, कम-से-कम ही हाथ लगाना, न होवे श्रृंगार धूमिल पहले डोली के।
हाथ फेरना नहीं दुबारा, बड़ी शर्मिली है ठाँवे वाली, इसी तरह एक बार फेरना बाम्बेवाली पर, जो है काफी नखरेवाली ।
छुयी-मुयी ठाँवे वाली है, अधिक पर भूला भटक वह जायेगी; फेरा हाथ अधिक नखरे वाली पर, मन सोख वनी रह जायेगी।
एक ठाँव को, जिला को दो, और तीन काफी है बाकी को, इससे अधिक न हाथ लगाना, चाहे पिया लगावें जितना बाकी हो।
एक सौ अस्सी के शतांश का, पाठ पढ़ो ए छाँटक भाई; फिर दे डोली को कन्धा झट पट, चलो रात दिन छाँटक भाई
सूरज से पहले पहुँचा दो, लाली में रूप पिया को दिखलाउ, चाहे रखो तुम छुक-छुक में, या उइन खटोले, होत भोर पहुँचाओ।
हाथ अधिक फेरोगे, लहंगा फट जायेगा, बिन्दीयाँ मिट जायेगी;
पिया पास जाने के पहले, यारों के बीच आबरू बिक जायेगी ।
इस जिला योग छटनी को भैया, मन में रखो उतार, चिट्ठी जितनी जल्दी पहुँचे, उतना ही सबका होगा उबार।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की सैंतालीसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)
