
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 अप्रैल।कृषि विज्ञान केंद्र आरा द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं कृषि उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर सतत जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है । इसके तहत ऑन-कैंपस एवं ऑफ-कैंपस प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है । कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम ने बताया कि उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करता है और लंबे समय में उत्पादन घटा सकता है । इसलिए किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए । प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश (एनपीके) के संतुलित उपयोग के साथ-साथ गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के प्रयोग की जानकारी दी जा रही है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो और कृषि में स्थिरता लाई जा सके । केवीके के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को नई तकनीकों से अवगत करा रहे हैं, जिससे वे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें । डॉ. राम नरेश ने कहा कि इस पहल से भविष्य में किसानों की आय में वृद्धि होगी और टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूती मिलेगी ।
