24 अप्रैल से 11 मई तक चलेगा अभियान, हर पंचायत में ऑन-स्पॉट समाधान का निर्देश।
RKTV NEWS/चतरा (झारखंड)22 अप्रैल।आसन्न ग्रीष्म ऋतु में संभावित पेयजल संकट को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त रवि आनंद के निर्देशानुसार चतरा जिला प्रशासन द्वारा दिनांक 24 अप्रैल 2026 से 11 मई 2026 तक जिले के सभी 154 पंचायतों में *“पेयजल समस्या निवारण पखवाड़ा”* संचालित किया जा रहा है।
यह अभियान केवल पेयजल समस्या के समाधान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, आजीविका, कृषि, पशुपालन एवं आधारभूत संरचना से जुड़े समग्र विकास को भी गति देगा। उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि हर पंचायत में ठोस एवं स्थायी परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे।
डीसी का फोकस : फील्ड आधारित कार्रवाई, हर पंचायत में सघन निरीक्षण
उपायुक्त रवि आनंद के निर्देशानुसार जिले के वरीय पदाधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मियों को सम्मिलित करते हुए विशेष संयुक्त जांच दलों का गठन किया गया है।
ये दल पंचायतों में पहुंचकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ बैठक करेंगे, पेयजल संकटग्रस्त बसावटों का भौतिक सत्यापन करेंगे तथा समस्याओं का ऑन-स्पॉट समाधान सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी को जांच दल का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
पूर्व तैयारी पर सख्ती : खराब जलस्रोतों की वार्डवार सूची अनिवार्य
उपायुक्त ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निरीक्षण से पूर्व अपने क्षेत्र में पूर्णतः अकार्यरत चापाकलों, ग्रीष्मकाल में सूखने वाले कुओं एवं बंद पड़ी जलमीनारों की वार्डवार त्रुटिहीन सूची तैयार करें। यह सूची निरीक्षण के दिन पंचायत भवन में जांच दल को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे बिना विलंब के स्थलीय सत्यापन एवं सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
त्वरित समाधान का स्पष्ट निर्देश : 24 घंटे में काम शुरू, 48 घंटे में मरम्मत
उपायुक्त के निर्देशानुसार पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, चतरा के कार्यपालक अभियंता को “विशेष तकनीकी नोडल पदाधिकारी (फ्लाइंग स्क्वाड)” के रूप में नामित किया गया है। वे प्रतिदिन अति संवेदनशील पंचायतों का औचक निरीक्षण करेंगे तथा वृहद मरम्मत अथवा डीप बोरिंग के प्राक्कलनों को उसी दिन स्वीकृत कर 24 घंटे के भीतर कार्य प्रारंभ कराएंगे। बंद पड़े चापाकलों की मरम्मत 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित की जाएगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग : “Chatra Water Task Force” के माध्यम से सख्त अनुश्रवण
अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तर पर “Chatra Water Task Force” व्हाट्सएप ग्रुप का गठन किया गया है।
प्रत्येक निरीक्षण के उपरांत कार्यवाही पंजी संधारित करते हुए जियो-टैग तस्वीरें एवं रिपोर्ट प्रतिदिन शाम 5 बजे तक अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। उपायुक्त स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, जिससे कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
जनभागीदारी से विकास : ग्राम सभा के माध्यम से योजनाओं का चयन
उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि सभी पंचायतों में आवश्यकता आधारित योजनाओं का चयन ग्राम सभा के माध्यम से किया जाए।
इसके अंतर्गत पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, कृषि, पशुपालन, सिंचाई एवं आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्य सुनिश्चित हो सके।
कंट्रोल रूम की स्थापना : आमजनों के लिए सीधी सुविधा
उपायुक्त के निर्देश पर पेयजल समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु अपर समाहर्ता के नियंत्रण में जिला कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। मोबाइल : 9117619352 लैंडलाइन : 06541-253219 यहां प्राप्त शिकायतों को तत्काल संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को अग्रसारित कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
24 अप्रैल से अभियान की शुरुआत : विभिन्न पंचायतों में शिविर आयोजित
उपायुक्त के निर्देशानुसार पखवाड़ा के प्रथम दिन 24 अप्रैल को जिले के विभिन्न प्रखंडों में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
चतरा प्रखंड के लेम एवं जांगी, गिद्धौर के गिद्धौर, हंटरगंज के जोलडीहा एवं गेरुआ, प्रतापपुर के घोड़दौड़ एवं एघारा, कुंदा के कुंदा, लावालौंग के रिमी, सिमरिया के जीर्वाखुर्द एवं जांगी, इटखोरी के कोनी एवं परसौनी, मयूरहंड के कदगांवां कला, कान्हाचट्टी के बैंगोकला तथा टंडवा के राहम एवं मिश्रौल पंचायतों में शिविर लगाए जाएंगे।
नगर परिषद क्षेत्र में वार्ड संख्या 1 (नगर परिषद चतरा) एवं वार्ड संख्या 2 (आश्रयगृह डोमसिटवा) में भी शिविर आयोजित होंगे, जहां आमजनों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई : जवाबदेही तय
उपायुक्त ने स्पष्ट कहा है कि यह पखवाड़ा आपदा प्रबंधन के अंतर्गत संचालित होगा। यदि कोई पदाधिकारी या कर्मी बिना अनुमति अनुपस्थित पाया जाता है अथवा कार्य में लापरवाही बरतता है, तो उसके विरुद्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 एवं झारखंड पंचायती राज अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पखवाड़ा समाप्ति के बाद भी यदि किसी निरीक्षित पंचायत में पेयजल संकट की शिकायत मिलती है, तो संबंधित निरीक्षण दल को व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।
व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश : अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित
उपायुक्त रवि आनंद ने जिला जनसंपर्क पदाधिकारी एवं सभी प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि निरीक्षण के दौरान अधिक से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले।

